करौंथा गांव स्थित सतलोक आश्रम के बाहर 16 साल पहले हुई हिंसा के दौरान पुलिस अधिकारियों के आवागमन के रिकॉर्ड से लेकर सदर थाने की उस समय की लॉकबुक व रोजनामचे का रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं हैं। आरोप है कि पुलिस ने 2007 में अदालत के आदेश के बावजूद रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया। इसके चलते रामपाल पक्ष की तरफ से जिला अदालत में पुलिस के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की याचिका की गई।
याचिका पर सोमवार को एडीजे राजकुमार यादव की अदालत में सुनवाई हुई। केस को एडीजे राकेश सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। अब केस में 15 सितंबर को सुनवाई होगी। क्योंकि इसी अदालत में रामपाल के खिलाफ हत्या के दर्ज केस की सुनवाई चल रही है।
रामपाल के वकील पीयूष गक्खड़ ने बताया कि 2006 में सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ था, जिसकी जिला अदालत में सुनवाई चल रही है। 2007 में अदालत में याचिका दायर करके बचाव पक्ष ने मांग की थी कि आश्रम के बाहर हुई हिंसा के दौरान पुलिस के आला अधिकारियों के घटनास्थल तक के आवागमन, सदर थाना पुलिस के रोजनामचे व लॉकबुक का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। यह रिकॉर्ड बचाव पक्ष के लिए काफी अहम है। अदालत ने याचिका स्वीकार कर पुलिस को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए कहा था। वकील का आरोप है कि 2017 में जब बचाव पक्ष ने रिकॉर्ड की मांग की तो पुलिस ने बताया कि नियमों के तहत तीन साल बाद रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया गया। इसके चलते रामपाल पक्ष ने अदालत में कोर्ट की अवमानना की याचिका दायर की थी।
मुख्य केस के साथ होगी अब याचिका पर सुनवाई
वकील ने बताया कि रामपाल के खिलाफ हत्या के केस की सुनवाई एडीजे राकेश सिंह की अदालत में चल रही है। अब एडीजे राजकुमार यादव की अदालत से कोर्ट की अवमानना की सुनवाई की फाइल भी उसी अदालत में भेज दी गई, जिसमें मुख्य केस चल रहा है। मामले में अब सितंबर माह में सुनवाई होगी।
यह है मामला
हिसार जेल में बंद रामपाल का करौंथा गांव में सतलोक आश्रम है। स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी के चलते आर्य समाज व आसपास के ग्रामीण 2006 में रामपाल से नाराज हो गए थे। काफी संख्या में भीड़ सतलोक आश्रम के बाहर एकत्रित हो गई। गोली लगने से झज्जर जिले के युवक सोनू की मौत हो गई थी। हालात इतने बिगड़े कि तत्कालीन कांग्रेस की हुड्डा सरकार को अर्ध सैनिक बल बुलाने पड़े। रातोंरात आश्रम के बाहर से भीड़ हटाकर आश्रम खाली करवाया गया। रामपाल व उसके समर्थकों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में रामपाल को जमानत मिल गई। बरवाला में आश्रम बनाया गया। वहां भी हिंसा हो गई। अब रामपाल हिसार जेल में बंद है। बरवाला हिंसा केस का तो अदालत में निपटान हो चुका है, लेकिन रोहतक के करौंथा गांव में हुई हिंसा का मामला अब भी अदालत में चल रहा है।