भले ही सरकार खाने-पीने की चीजों पर प्राथमिक तौर पर मूल्य, बनाने की तिथि और उत्पाद में शामिल तत्वों का उल्लेख करती हो, लेकिन यह बात हरियाणा में बिक रही शराब पर लागू नहीं होती।
भले ही लोग मिलावटी शराब बेचकर लोगों की जान को खतरे में डाल दे।
प्रदेश सरकार की वर्ष 2013-14, 2014-15 आबकारी नीति में बोतल पर मूल्य अंकित करने और निर्माण तिथि अंकित करने जैसा कोई प्रावधान नहीं है।
इतना ही नहीं प्रदेश सरकार यह बताने के लिए भी बाध्य नहीं है कि शराब को बनाने में कौन-कौन से तत्वों का प्रयोग किया जाता है। इन सब बातों का खुलासा एडवोकेट नसीब पंघाल द्वारा लगाई गई आरटीआई के जवाब में हुआ है। उन्होंने आबकारी नीति व शराब बिक्री से संबंधित कई सवालों के जवाब विभाग से मांगे थे।
वकील नसीब पंघाल की ओर से 28 अप्रैल 2014 को विभाग में आरटीआई लगाकर करीब 11 सवालों के जवाब मांगे गए थे। पहले तो विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद 25 जून 2014 को पंघाल ने विभाग के राज्य जन सूचना अधिकारी के यहां अपील की थी। फिर 24 जुलाई 2014 को सवालों के जवाब दिये गए थे।
एक्साइज ड्यूटी व टैक्स देने के बावजूद एक्सपायरी डेट का उल्लेख नहीं
यदि आरटीआई में आबकारी व कारधान विभाग की ओर से दिये गए सवालों के जवाब पर गौर करें तो उपभोक्ता के एक्साइज ड्यूटी व अन्य टैक्स देने के बावजूद उसे शराब की एक्पायरी डेट नहीं बताई जाती। क्योंकि आबकारी नीतियों के तहत शराब की बोतल पर एक्सपायरी डेट करने का प्रावधान नहीं है। एडवोकेट नसीब पंघाल की ओर से ऐसे ही कई सवाल विभाग से पूछे गए, लेकिन अधिकतर सवालों के जवाब विभाग की ओर से टालमटोल करके दिये गए।
मूल्य, निमार्ण व उत्पादों की जानकारी मिले तो सुधरेगा सिस्टम
वैसे तो शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। मगर कुछ लोग जो ज्यादा शराब पीते है तो उनके लिए बोतल पर मूल्य, निर्माण की तारीख व शराब में शामिल तत्वों की जानकारी मिलना फायदेमंद हो सकता है।
ऐसे होगा फायदा
- बोतल पर मूल्य अंकित होने पर शराब की वजह से मौत होने पर किसी भी व्यक्ति को उपभोक्ता कोर्ट जाने का रास्ता मिल जाएगा। बिना बिल के वह कोर्ट में दावा नहीं कर सकता।
- संबंधित ठेक ा संचालक या कंपनी की ओर से कोई भी लापरवाही मिलने पर दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है
- अवैध शराब की बिक्री में कमी आएगी। क्योंकि सही मूल्य अंकित होने पर ठेके पर मौजूद सेल्समैन मूल्यों में हेरफेर कर महंगी या सस्ती शराब नहीं बेच सकेंगे। साथ ही शराब की भठ्ठी पर भी अंकुश लगेगा।
- शराब निर्माण में शामिल होने वाले तत्व पता होने से उपभोक्ता को उससे होने वाले नुकसान का अंदाजा होगा।
वर्जन
मेरे द्वारा लगाई गई आरटीआई में अभी तक कुछ सवालों के जवाब अधूरे है। आमजन को मिलावटी शराब से होने वाले नुकसान को देखते हुए अपनी बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करूंगा।
- नसीब पंघाल, एडवोकेट