जिले की सबसे छोटी पंचायत जेठपुर में रविवार को हुए पंचायत चुनाव में कई
रिकॉर्ड टूटे। विनोद कुमार ने मात्र 4 वोटों से चौधर कब्जाई तो सरपंच पद के
चार दावेदार मात्र 12 वोटों पर सिमटकर रह गए। हालात ये रहे कि एक
प्रत्याशी को तो मात्र अपना ही वोट मिला। खुद उसके परिजन भी उसे दगा दे गए।
कलानौर ब्लॉक के जेठपुर गांव में मात्र 324 वोट हैं। इसमें ज्यादातर
परिवार पंजाबी, जोगी, मुस्लिम और एससी समुदाय से जुड़े हैं। गांव में जाट
बिरादरी के मात्र दो परिवार हैं, जिसमें से एक परिवार की वोट है, जबकि
दूसरा बाहर से आकर रह रहा है।
सरपंच पद के लिए विनोद कुमार, सुमित, अनिल,
प्रदीप, रजत और किशनलाल मैदान में थे। 324 वोट में से शाम 4 बजे तक 300 वोट
डाले गए। जैसे ही मतगणना पूरी हुई तो अधिकारी भी अचंभित रह गए। प्रत्याशी
किशनलाल को मात्र 1 वोट, अनिल को 2, प्रदीप को 4 और रजत को 5 वोट मिले।
सुमित को 142 और विनोद कुमार को 146 वोट मिले। विनोद कुमार ने 4 वोटों के
अंतर से जीत हासिल की। 12 वोटों पर सिमटे चार प्रत्याशियों को देखकर तो यही
कहा जाएगा कि शायद परिजनों ने भी उनका साथ नहीं दिया। गौरतलब है कि विनोद
कुमार के पिता ओमप्रकाश 2002 में मात्र 9 वोट से सरपंची का चुनाव हार गए
थे।
कुछ यूं दी भाईचारे की मिसाल
शहर की चकाचौंध से दूर जेठपुर गांव
ने भाईचारे की मिसाल भी कायम की। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सभी
प्रत्याशी दिन भर लोगों के घर जाकर वोट की अपील करते तो शाम के समय आम
दिनों की भांति रोजाना एक साथ बैठा करते थे। इस भाईचारे का परिणाम मतगणना
के बाद भी देखने को मिला।
जैसे ही अधिकारियों ने विनोद कुमार को सरपंच
घोषित किया तो समर्थकों के साथ-साथ दूसरे नंबर पर रहने वाले प्रत्याशी
सुमित ने भी उनके साथ जश्न मनाया। यहां तक मतदान केंद्र के अंदर ही विनोद
को अपने कंधों पर बैठाकर खुशी जताई। जेबीटी और सीटेट पास विनोद कुमार का
कहना है कि वह गांव में सभी को एकसाथ लेकर चलेंगे।