हुड्डा परिवार की तीसरी पीढ़ी एक बार फिर संसद पहुंच गई है। करीब सवा साल पहले लोकसभा चुनाव में हारने के बाद दीपेंद्र हुड्डा राज्यसभा के रास्ते संसद में पहुंचे हैं। बुधवार को उन्होंने सांसद के तौर पर गोपनीयता की शपथ ली। अमर उजाला से बातचीत करते हुए दीपेंद्र ने कहा कि प्रदेश के 15 सांसदों में वह अकेले विपक्ष के सांसद हैं। उन्होंने जिस इमानदारी से अब तक रोहतक के लिए काम किया उसी प्रकार पूरे प्रदेश की आवाज उठाएंगे।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि प्रदेश के नौजवान, किसान, मजदूर हर वर्ग को उनका अधिकार दिलाने के लिए वे हमेशा आगे रहेंगे। इसके अलावा जो काम अभी तक पेंडिंग थे, उनको पूरा कराया जाएगा और संबंधित ग्रांट को जारी किया जाएगा। क्योंकि शपथ न लेने की वजह से वह कुछ कार्यों के लिए फंड रिलीज नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने बताया कि संविधान सभा में उनके दादा चौ. रणबीर सिंह हुड्डा ने पहली बार एमएसपी का मुद्दा उठाया था। अब वे संसद और संसद के बाहर किसानों के हित में उनकी आवाज उठाएंगे। गौरतलब है कि दीपेंद्र हुड्डा इससे पहले लगातार तीन बार रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं। बतौर सांसद यह उनका चौथा कार्यकाल होगा। सोशल मीडिया पर भी हुड्डा को लोगों की शुभकामनाएं मिल रही हैं।
सूबे की राजनीति में दीपेंद्र हुड्डा अहम
सूबे की राजनीति में हुड्डा परिवार का खास स्थान रहा है। दीपेंद्र हुड्डा के दादा चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा लगातार दो बाद सांसद रहे हैं। उनके पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश के सीएम रहे हैं। 2004 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रोहतक लोकसभा सीट जीती थी। इसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में भूपेंद्र हुड्डा सीएम बने और उन्होंने अपनी सीट छोड़ दी। इसी समय विदेश में शिक्षा गृहण कर रहे दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक लोकसभा सीट की टिकट देकर कांग्रेस ने चुनावी मैदान में उतारा और वह रिकार्ड वोटों से विजयी रहे। उन्होंने 2005 से 2009 तक पहला, 2009 से 2014 तक दूसरा व 2014 से 2019 तक तीसरा कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद अप्रैल 2019 में वह भाजपा के डॉ. अरविंद शर्मा से रोहतक लोकसभा सीट हार गए। इसके बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का रोहतक, सोनीपत, झज्जर में अच्छा प्रदर्शन रहा और इसमें हुड्डा समर्थक विधायक बने। इसके बाद कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए दीपेंद्र हुड्डा को मैदान में उतारा और अब दीपेंद्र संसद में अपनी चौथी पारी शुरू कर रहे हैं। वे तीन बार लोकसभा और अब राज्यसभा से बतौर सांसद लोगों की आवाज संसद में उठाएंगे।