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पत्नी प्रेमी संग चली गई तो निशक्त युवक ने फांसी लगा ली 

Sat, 30 Apr 2016 02:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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फांसी - फोटो : अमर उजाला
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पत्नी के अपने प्रेमी के साथ चले जाने से परेशान एक निशक्त युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले वह पत्नी के प्रेमी की शिकायत पुलिस से की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार सुबह भी वह पत्नी को लेने उसके प्रेमी के घर गया था, लेकिन उसने युवक को मारपीट कर भगा दिया। इससे परेशान होकर युवक ने खुदकुशी कर ली। युवक के दो छोटे बेटे और एक वृद्धा मां है। 
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पुलिस के मुताबिक 33 वर्षीय निशक्त दीपक (बचपन में ही आंखों की रोशनी चली गई थी) काफी समय से अपनी मां कैलाशो के साथ श्रीरामनगर कॉलोनी में रहता था। उसकी शादी करीब छह साल पहले बिहार के समस्तीपुर निवासी एक युवती से हुई थी। जानकारी के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले दीपक की पत्नी कॉलोनी के ही एक युवक के साथ चली गई। इसकी जानकारी होने पर दीपक मां के साथ पत्नी को लेने उसके प्रेमी के घर गया। दीपक ने जब युवक से अपनी पत्नी को उसके साथ भेजने की बात कही तो वह भड़क गया।

आरोप है कि पत्नी के प्रेमी ने दीपक और उसकी मां के साथ मारपीट की और दोनों को धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया। जब मारपीट की शिकायत लेकर दीपक शिवाजी कॉलोनी थाने में पहुंचा तो पुलिस ने उसकी नहीं सुनी। पुलिस की तरफ से कार्रवाई नहीं होने से परेशान दीपक शुक्रवार को एक बार फिर पत्नी को लाने उसके प्रेमी के घर पहुंच गया। इस बार भी पत्नी के प्रेमी ने दीपक की जमकर पिटाई की और भगा दिया।
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बताया जा रहा है कि इस वजह से दीपक तनाव में आ गया। जब देर शाम तक दीपक अपने कमरे से बाहर नहीं आया तो परिजन जैसे-तैसे अंदर पहुंचे तो उसका शव पंखे के हुक से लटका हुआ था। इसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया। मामले में थाना प्रभारी प्रवीन कुमार का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

बूढ़ी दादी के सहारे मोहित और रोहित 
दीपक के छह और चार साल के बेटे मोहित और रोहित सिर से मां की मामता तो चली ही गई पिता का भी साया उठा गया है। अब उनकी देखभाल के लिए बूढ़ी दादी बची है। दीपक की मौत के बाद अब परिवार में कोई भी कमाने वाला नहीं है। दीपक के पिता की मौत हो चुकी है, जबकि उसकी मां कैलाशो वृद्धा है। परिजनों ने बताया कि दीपक की बचपन में ही आंखों की रोशनी चली गई थी। इसके बाद से वह मेहनत मजदूरी करके परिवार का गुजारा कर रहा था। 
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