ऐसी ही कहानी है तिलक नगर निवासी पूनम की। जिन्होंने अपने घर की खाली पड़ी छत को एक सुंदर बगिया में बदल दिया। बगिया अब न सिर्फ उनके घर की शोभा बढ़ा रही है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। पूनम बताती हैं कि वह 10, 12 साल से पेड़-पौधे लगाती आई हैं।
उनके भाई अमरूद का बाग लगाते थे और उसी में सब्जियां उगाते थे। इसी को देखकर उन्हें पौधे लगाने का शौक पैदा हुआ। शादी के बाद जब वह ससुराल आईं तो घर में बगिया की जगह नहीं थी तो उन्होंने छत पर ही बगिया लगाकर अपना शोक पूरा किया।
पौधे में डालती हैं सब्जी का पानी
वह रोज सुबह जल्दी उठकर पौधों को पानी देती हैं। जैविक खाद का उपयोग करती हैं और हर पौधे की जरूरत को ध्यान में रखकर उसकी देखरेख करती हैं। अगर किसी पौधे में बीमारी लग जाए, तो वह तुरंत उसका उपचार करती हैं ताकि बाकी पौधे सुरक्षित रहें। वह सब्जी का पानी स्टोर करके रखती हैं और पौधे में डालती हैं। कभी-कभी चाय पत्ति का पानी भी डालती हैं जिससे पौधे अच्छे से ग्रो करें।
बगिया में लगे ये पौधे
बगिया में उन्होंने गेंदे, स्नेक प्लांट, चंपा, चमेली, गुड़हल, नागराज, सदाबहार, गुलाब, बेलपत्र, एलोवेरा, पारिजात, बल्ब के पौधे, जैड प्लांट, मनीप्लांट, दूब और तुलसी आदि पौधे लगा रखे हैं। उन्होंने बताया कि वह नर्सरी से पौधे खरीदकर लाती है और दोस्तों को भी पौधे गिफ्ट करती हैं।
दूब को जलाकर महकाती हैं घर
कहा कि उन्होंने दूब लगा रखी है। उसके ऊपर के भाग को तोड़कर अंगारी पर रख देती हैं। इससे पूरे घर में ताजगी महसूस होती है। इससे बदबू, कीट, मकौड़े सब भाग जाते हैं।
छत पर बगिया लगाने से घर का वातावरण ठंडा रहता है और मन को भी शांति मिलती है। व्यस्तता भरी जिंदगी में उन्हें थोड़ा समय निकालकर पौधों के बीच समय बिताना सुकून देता है।