एक कहावत है, जब दवा काम करना छोड़ देती है, तब दुआएं काम आती हैं। उत्तराखंड के अस्पतालों में मेडिकल उपकरण व बड़ी-बड़ी मशीनें सप्लाई करने की एजेंसी चलाने वाले सेक्टर एक निवासी विकास मित्तल से बेहतर यह बात कौन बता सकता है। गरीबों की दुआएं लेने के लिए हर रोज 400 से 500 लोगों का खाना बनाकर बंटवा रहे मित्तल और उनकी पत्नी श्वेता मित्तल ने अपने अनुभव को अमर उजाला के साथ साझा किया और उन लोगों से आह्वान किया जो समाजसेवा करने में सामर्थ हैं, साथ आएं और मुहिम से जुड़े।
मित्तल ने बताया कि उनकी 13 वर्षीय बेटी ध्रुवी एपेंडिक्स से परेशान थी। दिल्ली के बड़े से बड़े अस्पताल में उपचार कराया। 23 दिन वह शालीमार बाग स्थित बड़े निजी अस्पताल में दाखिल रही। डॉक्टरों ने कहा कि पेट के अंदर अतड़ी गल गई हैं। ऐसे में ऑपरेशन करने में बहुत रिस्क है, लेकिन इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। यह बात दोस्तों, रिश्तेदारों व पड़ोसियों को पता चली। सभी ने बेटी की सलामती के लिए दुआएं मांगी। यहां तक कि मंदिरों में पूजा की गई। इसी वर्ष एक जनवरी को ऑपरेशन होना था। ऑपरेशन के लिए जरूरी टेस्ट भी हो गए। ऑपरेशन से ठीक पहले डॉक्टर जब राउंड पर आया तो उसने कहा कि बेटी को आराम महसूस हो रहा है। ऑपरेशन के लिए एक दिन और इंतजार करेंगे। अगले दिन बेटी को ज्यादा आराम महसूस हुआ। धीरे-धीरे दवाइयां बंद कर दी गई। आज वह ठीक हो रही है। मेरा तो मानना है कि जब दवाइयां काम करना छोड़ देती हैं, जब लोगों की दुआएं ही काम आती हैं।
पांच दिन से 400 लोगों को खिला रहे खाना
विकास मित्तल ने बताया कि वार्ड-11 के पार्षद कदम सिंह अहलावत न केवल उनके पड़ोसी हैं, बल्कि सेक्टर एक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान भी रहे हैं। सबसे पहले उनसे बात की कि वे उन लोगों को खाना खिलाना चाहते हैं, जो लॉकडाउन के चलते भूखे हैं। कदम सिंह ने कहा कि, वे भी साथ देंगे। मुहिम में अमित अहलावत, युुवा साथी अनुराग परवाना, रामबीर ठेकेदार, सत्यनारायण जांगड़ा, रणबीर मास्टर, कृष्ण बतरा व सुमित सचदेवा भी जुड़ गए। हर रोज पांच दिन से 400 लोगों को खाना खिला रहे हैं। इसमें हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, रामगोपाल कॉलोनी व आसपास के एरिया में खाना बांटा जाता है।
मुहिम में साथ दें सेक्टरों के लोग, पुलिस भी कर रही सहयोग
वार्ड 11 के पार्षद कदम सिंह अहलावत ने कहा कि कारोबारी विकास मित्तल ने जो अभियान छेड़ा, उसमें दूसरे लोग भी जुड़ रहे हैं। कोई खाना बांटने में मदद कर रहा है तो कोई राशन भिजवाने लगा है। फिर भी बहुत लोग ऐसे हैं, जिनको खाना पहुंचाना है। सेक्टरों में रहने वाले लोग अगर हर रोज प्रति मकान 50-50 रुपये का सहयोग करें तो और भी बहुत लोगों तक खाना पहुंचाया जा सकता है। यहां तक पुलिस भी लोगों तक खाना पहुंचाने में मदद कर रही है।