भारतीय समानांतर फिल्मों के पितामह माने जाने वाले श्याम बेनेगल के निधन पर महाभारत के युद्धिष्ठिर और चर्चित अभिनेता गजेंद्र चौहान उनके साथ बिताए पलों को याद कर भावुक हो गए। उन्हें महान निर्देशक और फिल्मों की नई पौध का सच्चा मार्गदर्शक बताते हुए सुपवा के कुलपति ने ऐसी यादें साझा कीं, जो उनकी पारखी नजर को भी सामने लाती हैं।
श्याम बेनेगल के दिवंगत होने का समाचार मिलने पर गजेंद्र चौहान ने सोमवार को अमर उजाला से फोन पर बातचीत में महान निर्देशक से जुड़े कई यादगार किस्से बताए। युवा गजेंद्र जब मुंबई में बॉलीवुड में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब वह बेनेगल से मिलने उनके ऑफिस जाया करते थे। बेनेगल ने उनकी कद काठी और चेहरे का रंग देखकर गजेंद्र चौहान से कहा कि आपको काॅमर्शियल सिनेमा (मुख्यधारा की फिल्में) के लिए कोशिश करनी चाहिए। समानांतर सिनेमा (पैरेलल इंडस्ट्री) आपके लिए मुफीद नहीं रहेगा। हालांकि उन्होंने गजेंद्र का उत्साहवर्धन भी किया और राह भी दिखाई।
भूमिका, मंथन और सरदारी बेगम जैसी फिल्मों को याद करते हुए गजेंद्र चौहान ने बताया कि भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (पुणे) के जब वह अध्यक्ष थे, तब श्याम बेनेगल साहब उनका मार्गदर्शन करते थे। बेनेगल भी दो बार इस प्रतिष्ठित संस्थान के अध्यक्ष रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 6 साल पहले जब मुंबई में सिनेमा म्यूजियम का उद्घाटन किया था, उस अवसर पर मुलाकात में बेनेगल ने गजेंद्र चौहान के एफटीआईआई में किए काम की तारीफ की और कुछ सुझाव भी दिए। चौहान ने कहा कि श्याम बेनेगल का निर्देशन आने वाले नए निर्देशकों को राह दिखाता रहेगा।