फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निकले थे जिंदगी देने, घेर लिया मौत ने

विज्ञापन
हादसे में क्षतिग्रस्त हुई कार। संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन
तीन अलग-अलग गांवों के पांच दोस्त पीजीआईएमएस में अपने किसी परिचित को खून देकर उसकी जान बचाने के लिए निकले थे। लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था, रास्ते में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और चारों को मौत ने घेर लिया।
विज्ञापन

निडाना, बहुअकबरपुर और समरगोपालपुर गांवों के लिए 30 मार्च की रात भी आम दिनों के जैसी थी। खाना खाने के बाद लोग अपने-अपने गांवों में ही टहल रहे थे, एक-दूसरे से बातें कर रहे थे। कमोबेश यही हाल निडाना के विनय, गौरव और रितिक, समरगोपालपुर के राजीव और बहुअकबरपुर के संजय का था। ये पांचों भी अपने-अपने घरों में या आसपास ही थे और सोने की तैयारी कर रहे थे। तभी मुसीबत में फंसे एक व्यक्ति ने किसी एक दोस्त को फोन या व्हाट्सएप के जरिये संपर्क किया। संपर्क करने वाला या उसका कोई परिजन मुसीबत में था। वह पीजीआईएमएस में दाखिल था और उसे खून की सख्त जरूरत थी। पांचों दोस्त किसी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। बात सुनते ही एक-दूसरे को संपर्क किया और सभी ने फौरन ही पीजीआईएमएस जाने का फैसला कर लिया। रात करीब साढ़े बारह बजे वे अपने-अपने गांवों से कार में बैठे और पीजीआईएमएस के लिए निकल पड़े। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। हिसार रोड, भिवानी टी-प्वाइंट पर मौत उनका इंतजार कर रही थी। पीजीआईएमएस से लौटते समय उनकी तेज रफ्तार कार एक कैंटर की चपेट में आ गई और राजीव को छोड़कर बाकी चारों की मौत हो गई। गौरव की मां ने रात करीब दो बजे उसे फोन कर पूछा कि अब तक घर क्यों नहीं आया। उसने कहा कि बस थोड़ी देर में लौट आएगा। करीब सुबह चार बजे उन्हें उसकी मौत की खबर मिल गई। रितिक भी अपने घरवालों को यही कह कर गया था कि जल्दी आ जाएगा।
बड़ा गैरेज खोल कारें असेंबल करने का था सपना
निडाना निवासी विनय फिलहाल पढ़ रहा था। लेकिन वह हमेशा अपने घरवालों से कहता था कि बड़ा होकर अपना काम करेगा। उसके पिता राकेश जींद के काकड़ौत गांव के स्कूल में जूनियर लेक्चरर हैं। विनय उनके पास ही पढ़ता था। गमगीन पिता ने बताया कि विनय का दिमाग बहुत तेज था। उसका सपना था कि बड़ा होकर अपना गैरेज खोले। फिर उसमें बड़ी गाड़ियां असेंबल करे। वह बचपन से ही कारों के स्केच बनाया करता था। उसे कारों से खास प्यार था। दो फरवरी को ही उसका जन्मदिन था तो पिता ने कपड़े खरीदने के लिए ढाई हजार रुपए दिए थे। जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया गया था। विनय के छोटे भाई का जन्मदिन नौ अप्रैल को है, पिता ने उसे भी नए कपड़े खरीदने को पैसे दे दिए थे, बस जन्मदिन मनाने की तैयारी चल रही थी, लेकिन घर मातम में डूब गया।
विज्ञापन

उम्मीद थी कि जल्द संभाल लेगा घर की जिम्मेदारी
निडाना के गौरव के पिता कृष्ण एक किसान हैं। दुखों का पहाड़ झेल रहे कृष्ण कहते हैं कि अब खेतीबाड़ी में कुछ नहीं रहा। पहले तो घर का गुजारा हो जाता था, पर अब खेती बिल्कुल घाटे का सौदा बन गई है। गौरव पढ़ाई में अच्छा था, जाट कॉलेज से बीए कर रहा था। उनके परिवार की एकमात्र उम्मीद वही था। उन्हें लगता था कि जल्द वह पढ़ाई पूरी करे और नौकरी हासिल कर घर की जिम्मेदारी संभाल ले।
सेना, पुलिस में जाने का था सपना
निडाना निवासी रितिक 12वीं का छात्र था। उसके पिता श्रमिक हैं, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह अपने बच्चों की उम्मीदों को हमेशा पंख लगाए, जो भी बनना चाहते हैं, उसमें मदद की। रितिक का कद छह फीट से भी ज्यादा था। वह गांव की अकादमी में रोजाना दौड़ लगाता था। उसका सपना सेना या पुलिस में भर्ती होकर परिवार की आर्थिक मदद करना था। जनवरी में ही उसका जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया था। गांव वालों ने डीजे की धुनों पर जमकर डांस किया था। रितिक की मां हमेशा से उसका जन्मदिन धूमधाम से मनाती थी। उनके पास जन्मदिन की फोटो की कई अलबम भी हैं। रितिक की बहन वर्षा राज्यस्तर पर हरियाणा से फुटबॉल खेल चुकी है। आजतक दिल्ली के रॉयल फुटबॉल क्लब की ओर से खेल रही थी। उसके लिए रितिक प्रेरणास्रोत था, पर सब खत्म हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें