संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। विश्व बैंक की ओर से प्रदेश में जल क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए 5700 करोड़ रुपये के ऋण की स्वीकृति प्रदान की है। जल संरक्षित हरियाणा परियोजना के तहत प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है। परियोजना के तहत वर्ष 2026 से 2032 तक रोहतक मंडल के जिलों में जल संरक्षण पर भी कार्य किया जाएगा। यह कार्य 1 अप्रैल से शुरू होगा।
लघु सचिवालय स्थित सभागार में उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बुधवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उपायुक्त ने कहा कि विभाग जल संरक्षित हरियाणा परियोजना के तहत एस्टीमेट तैयार करें।
अधिकारी खारे पानी पर विशेष फोकस करें व इस परियोजना के तहत संपूर्ण जिले की कार्य योजना तैयार की जाए। विभाग की ओर से इस परियोजना के तहत कलानौर कलां की 2200 एकड़ भूमि का एस्टीमेट तैयार किया गया है। इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए उपरोक्त दोनों पद्धतियों पर कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत कृषि विभाग प्रदेश में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए ट्यूबवेल आधारित ड्रेनेज और सतही जल निकासी प्रणालियां विकसित करेगा। विभाग की ओर से सोलर आधारित ट्यूबवेल ड्रेनेज को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
रोहतक मंडल में 39,250 एकड़ भूमि संरक्षण के प्रस्ताव तैयार कर टेंडर अलॉट किए जा चुके हैं। इस दौरान कृषि उप निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक, जिला मत्स्य अधिकारी आशा हुड्डा, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. मदनलाल आदि मौजूद रहे।
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चार गांवों में सब सरफेस ड्रेनेज के तहत किया जा रहा कार्य
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की मंडल भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. नीना सहवाग ने बताया कि जिला के चार गांवों किलोई खास व किलोई दोपाना, रिठाल नरवाल व आसन में सब सरफेस ड्रेनेज (उप सतह जल निकासी) प्रणाली के तहत भूमि संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत भूमि के सतह पर आए साल्ट को पाइपों के माध्यम से हटाया जाता है।