नगर निगम के वार्ड-2 को एससी समुदाय के लिए आरक्षित करने के मामले की वीरवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि नगर निगम से पूछा गया था कि वार्ड-2 एससी व बीसी समुदाय की जनसंख्या कैसे तय की गई। इसका आधार क्या था। इस संबंध में कोई जवाब नहीं आया है। वकील संदीप शर्मा ने बताया कि सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डीसी रोहतक से वार्डबंदी को लेकर जवाब मांगा है। 17 फरवरी को मामले में अगली सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ता एडवोकेट राजेश सैनी ने नौ जनवरी को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि वार्डबंदी करते हुए बीसी समुदाय की जनसंख्या कम दिखाई गई है, जबकि एससी समुदाय की जनसंख्या ज्यादा दिखाई गई है। हाईकोर्ट में 10 फरवरी को निगम की तरफ से 37 पेज का जवाब दिया गया था, लेकिन वार्ड-2 की जनसंख्या के आंकड़ों का जिक्र कम, पूरे निगम के आंकड़ों का जिक्र ज्यादा था।