संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। सेक्टर 1 निवासी डॉ. वीना सचदेवा की बगिया प्रकृति, विज्ञान और सृजन का जीवंत संसार है। बगिया में सालभर विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे पुष्पों की अनुपम छटा बिखरी रहती है। इसकी हरियाली मन को आकर्षित व आनंदित करती है।
घर के आंगन में 25 साल पहले बनाई इस बगिया में अब 200 से अधिक पेड़-पौधे हैं। बगिया में फूलदार, फलदार, औषधीय व सजावटी पौधे हैं जिनकी देखभाल वे अपनी बेटी भक्ति के साथ मिलकर करती हैं।
बॉटनी विषय की प्रोफेसर डॉ. वीना बताती हैं कि घर का सबसे सुंदर कोना कोई है तो वह मेरी बगिया है। यह केवल फूलों और पौधों का समूह नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम, वनस्पति विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और सृजनात्मक सोच का जीवंत प्रतिबिंब है।
उनका कहना है कि यहां पर पक्षियों का मधुर कलरव सुनाई देता है। फूलों की भीनी-भीनी सुगंध वातावरण में घुलती रहती है। इससे तब मन स्वतः ही आनंद और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है। उनके पति सुरेंद्र सचदेवा भी इस बगिया की देखभाल में सहयोग करते हैं।
बगिया में इन प्रजातियों के पौधे
उनकी बगिया में गुलाब, गेंदा, गुड़हल, मोगरा, बेला, चमेली, रजनीगंधा, चंपा, हरसिंगार (पारिजात), सदाबहार, बोगनवेलिया, अपराजिता, मधुमालती, इक्सोरा (रुग्मिनी), लिली, सूरजमुखी और कमल जैसे फूल न केवल बगिया की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि समय अनुसार तितलियों, मधुमक्खियों को भी आकर्षित करते हैं। इससे जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा नींबू, किन्नू, आम, अशोक, पाम, मनी प्लांट, स्पाइडर प्लांट, जेड प्लांट, कैक्टस, सिंगोनियम, पीस लिली, तुलसी, मरुआ, गुलदाउदी, डहेलिया पिटूनिया, अडेनियम आदि अनेक प्रजातियों के पौधे भी हैं।
पिता नंदलाल का दिया पौधा है यादगार
डॉ. वीना बताती हैं कि उनके पिताजी डीएलएफ कॉलोनी निवासी नंदलाल ने उन्हें करीब 20 साल पहले नींबू का एक पौधा गिफ्ट किया था। वह पौधा आज उनके घर-आंगन की शोभा बढ़ा रहा है। उनके लिए वह यादगार पौधा है। अब यह पेड़ बन गया है। इस पर ढेरों नींबू लगते हैं। वे बगिया में लगे बड़े पौधों से अब छोटे पौधे तैयार करती हैं। उनको अपने जानकारों, रिश्तेदारों व परिचितों को किसी खास अवसर पर गिफ्ट करती हैं। बेटी भक्ति को भी पेड़-पौधों का बहुत शौक है। उन्होंने अपने आंगन में ही सक्यूलेंट पौधों की एक छोटी बगिया बनाई हुई है।
सकारात्मक जीवनशैली का आधार है बगिया
उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, विद्यालय या कार्यस्थल पर एक छोटी-सी बगिया अवश्य विकसित करनी चाहिए। यह केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली का आधार भी है। पौधों की देखभाल हमें धैर्य, अनुशासन, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का पाठ पढ़ाती है। किचन वेस्ट से तरल खाद तैयार कर वे पौधों में देती हैं। परिवार के सहयोग से बगिया खूब हरी-भरी बनी हुई है।