जुलाई में हुए वैश्य संस्था के चुनाव का परिणाम बृहस्पतिवार को घोषित कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद डीसी और चुनाव अधिकारी ने सोसायटी कार्यालय में विजेता पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र दिए। हालांकि अभी तक विजेताओं को गवर्निंग बॉडी का कार्यभार नहीं दिया गया है।
बता दें कि वैश्य संस्था में 15 जुलाई को चुनाव कराया गया था। इसी बीच कॉलेजियम सदस्य सुरेश गुप्ता की याचिका के कारण चुनाव अधर में लटक गया। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन ने चुनाव का परिणाम अधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया। तभी से यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद बृहस्पतिवार को डीसी अतुल कुमार और चुनाव अधिकारी व शुगर मिल के एमडी अरविंद मल्हाण ने सोसायटी कार्यालय में विजेता पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र दिए। हालांकि प्रमाण पत्र वितरित कर दिए गए हैं, लेकिन अभी तक गवर्निंग बॉडी का कार्यभार नहीं मिला है। नवनियुक्त प्रधान राजेंद्र बंसल का कहना है कि इस संबंध में प्रशासक से बात हो गई है। शुक्रवार को कार्यभार मिल जाएगा। संस्था में काफी घोटाले और फर्जीवाड़े हुए हैं। कार्यभार मिलते ही इसकी जांच कराई जाएगी। संस्था के हित को लेकर जो भी काम होगा वह किया जाएगा। जिन कर्मचारियों को निकाला गया है, उन्हें भी रोजगार देने का प्रयास किया जाएगा।
इन विजेताओं को मिले प्रमाण पत्र
राजेंद्र बंसल प्रधान, उप प्रधान विनय जैन, विजय गुप्ता बाबा को सचिव, संजय भालौठिया सहसचिव और लोकेश जैन कोषाध्यक्ष बने। इसके अलावा अनिल कुमार, आशु गुप्ता, कैलाश चंद, जयदेव, प्रमोद बंसल, मनीष बंसल, मुनीलाल गर्ग, मनोज कुमार, मोहन गुप्ता, राजेश बंसल, ललित कुमार, विकास गुप्ता, विवेक गोयल, शंकरलाल, संजय गुप्ता और सुरेश चंद गुप्ता को कार्यकारिणी सदस्य चुना गया है।
कॉलेजियम सदस्य सुरेश गुप्ता के खिलाफ डाली याचिका
हाईकोर्ट से चुनाव का रास्ता साफ होने पर विजय गुप्ता की तरफ से हाईकोर्ट में सुरेश गुप्ता के खिलाफ याचिका दायर कर दी गई है। आरोप लगाया गया है कि सुरेश गुप्ता ने कोर्ट की अवमानना की है और चुनाव को लेकर लोगों को गुमराह किया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को सुनवाई का समय दिया है।
यूं बोले कॉलेजिय सदस्य
उधर, कॉलेजियम सदस्य सुरेश गुप्ता का कहना है कि कार्यभार नहीं, सिर्फ प्रमाण पत्र दिए गए हैं। मेरे ऊपर जो आरोप लगाकर याचिका दायर की है, वह गलत है। मुझे इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ता और न ही मैं इससे डरने वाला हूं। अगर यहां पर न्याय नहीं मिला तो मामले को डबल बेंच में लेकर जाऊंगा।
मात्र दस माह का होगा कार्यकाल
संस्था के नवनियुक्त पदाधिकारियों को यदि अब कार्यभार मिलता है तो वह केवल दस माह का ही होगा। अगले साल जुलाई में गवर्निंग बॉडी का समय खत्म हो जाएगा। इसके बाद फिर से संस्था में चुनाव होने तय हैं। ऐसे में नए पदाधिकारियों को खुद को साबित करने के लिए मात्र दस माह का समय मिलेगा। यदि इस अवधि में पदाधिकारी संस्था के हित में कोई बड़ा कदम उठाते हैं तो ही वे वोटरों का दिल जीत सकते हैं, अन्यथा उन्हें अगली बार चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।