सुभाष चंद्र बोस को वार क्रिमिनल मानने के लिए यूएनओ को पूरी दुनिया से
माफी मांगनी चाहिए। भारत से भी यूएनओ माफी मांगे। साथ ही सभी दस्तावेजों से
उनकेनाम के साथ लिखा वार क्रिमिनल शब्द भी हटाया जाना चाहिए। यह एक बड़ा
अपराध है, एक गाली की तरह है। यह बात आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के
सदस्य इंद्रेश ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में कही।
पीजीआई के डेंटल
कॉलेज के सभागार में आयोजित प्रबुद्ध नागरिक विचार गोष्ठी में शामिल होने
आए इंद्रेश ने कहा कि कुछ लोगों ने बोस की फाइल 70 वर्षों में कभी नहीं
खुलने दी। अब जब यह फाइलें खुलने लगी हैं तो सच सामने आने का रास्ता भी खुल
गया है।
यह सच भी सामने आ गया है कि उन्हें देश के तत्कालीन नेता ने ही
वार क्रिमिनल घोषित कराया था। अब जब सच सामने है तो यूएनओ को भी अपनी गलती
मान लेनी चाहिए और सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस को विश्व देश भक्ति दिवस के
रूप में मनाने की घोषणा करनी चाहिए।
एक सवाल के जवाब में इंद्रेश ने
कहा कि देश में नई राजनीति और रणनीति ने जन्म लिया है। सबका साथ सबका विकास
के ध्येय के साथ काम हो रहा है। देश विकास की ओर तेज गति से बढ़ रहा है।
जो पिछले 70 वर्षों में नहीं हुआ वह अब हो रहा है। विश्व के जो देश भारत को
कमतर आंकते थे, अब उन्हीं देशों में भारत माता की जय के नारे लग रहे हैं।
देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि लोगों में स्वच्छता के प्रति प्रेम दिखाई
दे रहा है। बेटी बचाओ के जरिये एक क्रांति आई है।
मर्ज पुराना है, नए इलाज भी ढूंढने होंगे
इंद्रेश
ने कहा कि कुछ लोगों ने दलित अल्पसंख्यक जैसे शब्दों का उपयोग कर लोगों को
बांटने का काम किया है। आजादी के बाद से ही इन नेताओं ने बांटने, लड़ाने
की राजनीति की। लेकिन अब धीरे धीरे हम पुराने से नए ढंग की तरफ बढ़ रहे
हैं। कई समस्याएं हैं। उनके समाधान भी हैं। कुछ मर्ज पुराने हैं। उनके लिए
नए इलाज भी ढूंढने होंगे।