रोहतक। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से जुड़े फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा कि आज का दौर बेहद तेज हो गया है। फिल्म, टीवी, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर इतना कंटेंट मौजूद है कि दर्शक खुद तय नहीं कर पा रहा कि क्या देखें।
खासकर जेन-जी पीढ़ी कम समय में सब कुछ हासिल करना चाहती है जबकि कला और जीवन में ठहराव बेहद जरूरी है। यशपाल शर्मा ने कहा कि रचनात्मकता कभी पत्थर की लकीर नहीं होती। हर निर्देशक, लेखक और कलाकार का अपना नजरिया होता है।
सिनेमा तय फार्मूलों से नहीं बनता बल्कि विचार और दृष्टिकोण से आकार लेता है। यशपाल शर्मा ने बताया कि वह एक वेब सीरीज पर काम कर रहे हैं और मई में एक नए सीरियल पर काम शुरू करने की योजना है।
उभरते कलाकारों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि मेहनत के साथ आत्मविश्वास और खुद को पहचानना बेहद जरूरी है। कर्म ही पूजा है, इसी से पहचान बनती है। संवाद
पुराने सिनेमा की सहजता आज कम होती जा रही
दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (सुपवा) में सोमवार को आयोजित भारत रंग महोत्सव (भारंगम) व सारंग महोत्सव में पहुंचे यशपाल शर्मा ने कहा कि पुराने दौर के गीतों और सिनेमा में जो गहराई, सादगी और ठहराव था, वह आज कम नजर आता है। गुलजार साहब जैसे रचनाकारों की संवेदनशीलता और भावनात्मक ठहराव आज की तेज रफ्तार फिल्मों में दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि हर फिल्म में मारपीट, चमत्कार और जबरदस्ती सब कुछ एक साथ नहीं डाला जा सकता। बॉर्डर जैसी फिल्में आज भी दर्शकों को इसलिए पसंद आती हैं, क्योंकि उनमें भावना, उद्देश्य और बुराई के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का संदेश साफ तौर पर दिखता है।
बिना जरूरत का कंटेंट और अनावश्यक दृश्य भी परोसे जा रहे
ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर उन्होंने कहा कि यहां नए कलाकारों, निर्देशक और लेखकों को अच्छे अवसर मिल रहे हैं लेकिन कई बार बिना जरूरत का कंटेंट और अनावश्यक दृश्य भी परोसे जा रहे हैं जो सिनेमा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। आज की पीढ़ी अक्सर दूसरों जैसा बनने की कोशिश करती है, जबकि सच्चाई यह है कि हर इंसान अपने आप में यूनिक है। जो आप हैं, वही आपकी सबसे बड़ी ताकत और पहचान है।