नए शैक्षणिक सत्र में एमडीयू से संबद्ध कॉलेज मनमर्जी से सीटों नहीं बढ़ा सकेंगे। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ऐसा करने वाले कॉलेजों पर शिकंजा कस दिया है। यूनिवर्सिटी ने सभी कॉलेजों के लिए सीटें निर्धारित कर दी हैं। इसके बाद भी यदि किसी कॉलेज में सीटें बढ़ानी पड़ीं तो इसके लिए यूनिवर्सिटी की पूर्व अनुमति लेनी होगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन यह अनुमति भी कॉलेज के संसाधनों की पड़ताल के बाद देगा।
दरअसल, दशकों से ढेरों ऐसे कॉलेज चल रहे हैं, जिनकी सीटों का यूनिवर्सिटी के पास रिकार्ड नहीं है। ऐसे कॉलेजों में पिछले सत्र में हुए प्रवेश की संख्या को देखकर ही नए सत्र की सीटों का निर्धारण किया जाता था। इसका सीधा फायदा प्राइवेट कॉलेज उठाते थे। यदि किसी कॉलेज में 500 सीटें आवंटित हैं तो बाद में मैनेजमेंट के दबाव या अन्य सिफारिश से सीटें बढ़ा दी जाती थीं। ऐसा करने वाले कॉलेजों पर यूनिवर्सिटी ने इस सत्र से शिकंजा कस दिया है। यूनिवर्सिटी ने संबद्ध कॉलेजों की सीटें निर्धारित कर दी हैं।
यह निर्धारण कॉलेजों में होने वाले पुराने प्रवेश को ही आधार मानकर किया गया है। हालांकि यूनिवर्सिटी ने सख्त हिदायत दी है कि जो भी सीटें निर्धारित की गईं हैं, अब उसके अतिरिक्त एक भी प्रवेश नहीं हो सकते। यदि किसी कारण से सीट बढ़ानी है तो पहले यूनिवर्सिटी को अवगत करवाया जाएगा, जिसके बाद यूनिवर्सिटी की कमेटी कॉलेज के संसाधनों को देखेगी, तभी जाकर सीटें बढ़ेंगी।
कॉलेजों को होगा नुकसान
यूनिवर्सिटी के इस फैसले से कॉलेजों को सीधा नुकसान होगा। अब वह अपनी मर्जी से सीटें नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे कॉलेजों में छात्रों की संख्या तो सीमित होगी ही, आमदनी भी प्रभावित होगी।
सभी कॉलेजों में सीटें निर्धारित की गईं हैं। इससे यूनिवर्सिटी में हर कॉलेज का रिकार्ड रहेगा और उनकी मनमानी भी नहीं चल सकेगी।
- प्रो. सेवा सिंह दहिया, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल, एमडीयू।