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हिम्मत न हारने वालों ने ही जीती कोरोना से जंग

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कोरोना से जंग जीतने के बाद फिर लोगों को बचाने में लगे जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनिलजीत त्रेहन कहते हैं, जो डर गया सो हार गया। यह महामारी का दौर है, अनेक लोग उसकी चपेट में आए। लेकिन विजय उन्हें ही मिली जिन्होंने हिम्मत नहीं हारी। महामारी का शिकार होने पर उन लोगों को जहन में रहना चाहिए जिन्होंने इसे हराया है।
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डॉ. त्रेहन ने कहा कि जहां तक संभव हो सके संक्रमण के दौरान खुश रहने का प्रयास करें। वह सभी तरीके, माध्यम अपनाए जिनसे व्यक्ति खुश रह सकता है, तनाव कतई न लें। प्रोटीन डाइट लें, मनोवैज्ञानिक दबाव में न आएं। ऑक्सीमीटर से अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें। जब ऑक्सीजन लेवल 93 से नीचे जाए तभी डॉक्टर से सलाह लें। सामान्य तौर पर पांच से सात दिन में यह संक्रमण खत्म हो जाता है। वहीं, जिला महिला व बाल विकास अधिकारी बिमलेश कुमारी ने भी अपने हौसले से कोरोना पर विजय हासिल की, वह तो संक्रमण के दौरान भी डिजिटल माध्यम से काम भी करती रहीं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार शुरू कर दिया जाए तो निश्चित रूप से व्यक्ति को विजय मिलती है। बिमलेश कुमारी ने बताया कि वह दिन में तीन बार आयुर्वेदिक काढ़ा लेती थीं, चार बार भाप लेती थीं और भाप लेते समय पानी में चुटकी भर नमक डालती थीं। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं लीं। बिमलेश कुमारी ने कहा कि हरेक को इससे बचाव की वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। जिन लोगों ने टीका लगवा रखा है उन पर कोरोना का ज्यादा प्रभाव नहीं देखने को मिला। मुख्यमंत्री के ओएसडी (प्रचार) गजेंद्र फौगाट ने बताया कि पत्नी शिखा व बेटे आर्यन के संक्रमित होने के बाद भी घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखा। यही वजह है कि वे घर पर ही कोरोना को मात देने में कामयाब रहे। फौगाट ने बताया कि उनकी पत्नी संक्रमित हो गई थीं। बेटे का सीटी स्कैन करवाया था। लेकिन उनमें कोरोना के लक्षण नहीं थे। पर आइसोलेशन का सिद्धांत अपनाया, सकारात्मक वातावरण पैदा किया और डॉक्टर के परामर्श से दवाएं लीं। आखिर दस दिन में पूरा परिवार स्वस्थ हो गया। फौगाट ने कहा कि सभी को संक्रमण के दौरान सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।
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