सामान्य अस्पताल में शनिवार को थैरेपी लेने पहुुंचे सीएम को बैरंग लौटना पड़ा।
बाद में व्यवस्थाओं को देखते हुए सीएम ने अस्पताल प्रशासन को व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
दरअसल शहर में पहुंचने पर आयुष विभाग ने जानकारियां जुटाई कि दिनचर्या क्या है।
विभाग ने पता लगाया कि सीएम सुबह अंबाला या चंडीगढ़ में अध्यंग थैरेपी लेते हैं। ऐसे में रोहतक में दो स्पेशल संवदेन यंत्र में एक खराब है और दूसरे में कभी-कभी समस्या आ जाती है।
इस वजह से आयुष विभाग ने झज्जर से एक यंत्र को मंगवाया। बताया जा रहा है कि सीएम को सुबह साढ़े पांच बजे अस्पताल पहुंचना था, जबकि पौने छह बजे पहुंचे। पहले पंचकर्म कक्ष की ओर से गए। लेकिन, व्यवस्थाओं के दुरुस्त न होने के चलते सीएम बगैर थैरेपी कराए ही करीब 20 मिनट तक अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए निकल पड़े।
20 मिनट तक किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सुबह साढे़ पांच बजे सामान्य अस्पताल पहुंचना था, वे करीब पौने 6 बजे पहुंचे और सीधे पंचकर्म कक्ष की ओर गए। यहां से पूरे अस्पताल का निरीक्षण करते हुए करीब 20 मिनट परिसर में ही रहे।
सीएम के आने से पहले पंचकर्म का तोड़ना पड़ा ताला
सीएम के आने की सूचना के बाद भी शनिवार सुबह पंचकर्म थैरेपी कक्ष के कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचे। वहीं सीएम की सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे सुरक्षा कर्मियों ने अस्पताल कर्मचारी के देरी होते देख कक्ष का ताला तुड़वा दिया। इसके बाद साफ सफाई करवाई गई।
आयुष विभाग की खुली पोल
सामान्य अस्पताल में पहुंचने पर अस्पताल गेट से लेकर अंदर तक आयुष विभाग की शाखाओं और व्यवस्थाओं का जिक्र नहीं था। जबकि यह सुविधा कुछ ही जिलों में उपलब्ध है।
बोले सीएम, ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए थैरेपी कक्ष
सीएम उस हैरान थे, जब उन्हें पंचकर्म थैरेपी कक्ष दूसरी मंजिल में होने का पता चला। उन्होंने कहा कि यह कक्ष ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए। इस थैरेपी के लिए तो अधिकांश वृद्ध लोग आते हैं। बताया जा रहा है कि आयुष विभाग ने सामान्य अस्पताल प्रशासन से पहले भी इस कक्ष को ग्राउंड फ्लोर में शिफ्ट करने की मांग की थी।
आयुष विभाग बोला, नहीं दी सीएम के आने की सूचना
सीएम आगमन के बाद स्वास्थ्य विभाग और आयुष विभाग में मनमुटाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। आयुष विभाग का कहना है कि सीएम के आने की पूर्व सूचना होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उनके आने की सूचना नहीं दी थी। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। हैरानी की बात रही कि जब आयुष विभाग ने झज्जर से संवेदन यंत्र मंगा लिया तो उन्हें सीएम के आने की जानकारी कैसे नहीं थी।
क्या है अध्यंग थैरेपी
अध्यंग थैरेपी के लिए करीब पौना से एक घंटा समय लगता है। इसके लिए दो स्टाफ सदस्यों का होना जरूरी होता है। इसे बाय वादी, मसाज, फिटनेस, प्रीवेंसन, रिजूलेशन, थकावट दूर करने, जकड़न से राहत व नींद के लिए प्रयोग में लाया जाता है। सूत्रों की मानें तो सीएम आयुष विभाग के पूरे सेटअप को देखने और थैरेपी लेने के लिए आए थे। उन्होंने शिरोधारा से संबंधित जानकारी एकत्रित की और ड्राई संवेदन यंत्र के बारे में विस्तार से पूछा।
दिन की सफाई रात को काम आई
शुक्रवार दिन में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के आने की सूचना पर सामान्य अस्पताल में साफ-सफाई करवाई गई थी। जबकि देर शाम पता चला कि एचएम नहीं आएंगे। वहीं सीएम के आने की सूचना मिलते ही शुक्रवार रात में एक बार फिर से कर्मचारी सफाई में जुट गए। व्यवस्थाओं को सही करनवाने में खुद सीएमओ डॉ. शिवकुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. सुषमा नैन पूरे स्टाफ सहित मौजूद रहीं।
थैरेपी के लिए शुल्क हो सकता है निर्धारित
आयुष विभाग में थैरेपी लेने वालों के लिए शुल्क निर्धारित किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो स्वयं मुख्यमंत्री ने भी इस पर अपनी सहमति जताई है। इस शुल्क से नई मशीनों की खरीद की जा सकेगी।
बोले अधिकारी
पंचकर्म थैरेपी के लिए ग्राउंड फ्लोर पर जगह देंगे। इसके साथ ही आयुष की ओपीडी को कहीं अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। थैरेपी सेंटर दूसरी मंजिल पर जगह की कमी होने के चलते बनाया गया था। वहां मरीजों के जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा है।
- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, सामान्य अस्पताल