16सीटीके29..सरकारी अस्पताल में रखी एक्सरे मशीन। संवाद
रोहतक। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हैं। स्वास्थ्य विभाग के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीज एक्स-रे की सुविधा से वंचित हैं। घायलों व छाती रोग के मरीजों को इलाज के लिए रोहतक का रुख करना पड़ता है। विभाग की दो सीएचसी में एक्स-रे मशीन ही नहीं है, जबकि तीन जगह खराब पड़ी हैं। विभाग की ओर से इन्हें दुरुस्त नहीं कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए सामान्य अस्पतालों के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी व्यवस्था बनाई है। इसके तहत एक्स-रे मशीनें लगाना भी शामिल हैं। विभाग की मदीना व लाखनमाजरा सीएचसी में एक्स-रे मशीन ही नहीं है। बगैर मशीन के यहां एक्स-रे होना असंभव है। किलोई, चिड़ी व काहनौर में मशीनें हैं, मगर ये अरसे से बंद पड़ी हैं। तकनीकी खराबी के चलते इन्हें उपयोग नहीं किया जा रहा है। नतीजतन इन केंद्रों पर एक्स-रे की जरूरत वाले मरीजों को यहां मायूसी हाथ लगती है। इन्हें रोहतक रेफर कर दिया जाता है या निजी लैब की शरण लेनी पड़ती है।
निजी लैब में 650 रपुये अधिक चुकाने पड़ रहे
निजी लैब में लोगों को एक्स-रे के लिए करीब 750 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में मात्र 100 रुपये फीस निर्धारित है। सामान्य अस्पताल में दोपहर दो बजे तक रोजाना औसतन 80 एक्स-रे हो जाते हैं। शेष मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। अस्पताल में अकेले हड्डी रोग में ही 200 से ज्यादा मरीज आते हैं। इनमें से ज्यादातर को एक्स-रे की जरूरत पड़ती है।
स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एक्स-रे व अन्य जांच की सुविधा दी गई है। कुछ जगह मशीन नहीं हैं। वहां मशीन लगाई जाएगी। एक्स-रे मशीन खराब होने की सूचना नहीं है।
डॉ. रमेशचंद्र, सिविल सर्जन।
10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक्स-रे मशीनों का ब्योरा
सीएचसी संख्या
किलोई खराब
चिड़ी खराब
महम अस्पताल
कलानौर अस्पताल
मदीना मशीन नहीं है
काहनौर खराब
सेक्टर-3 पाॅलीक्लीनिक
गोकर्ण यूपीएचसी
लाखनमाजरा मशीन नहीं है