विसरा रिपोर्ट मिलने में हो रही देरी पर फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) मधुबन ने अपनी सफाई पेश की है। लैब के अधिकारियों ने डेढ़ वर्ष का डाटा जारी करके दावा किया है कि रिपोर्ट देने में अब उनकी तरफ से कोई देरी नहीं की जा रही है। बता दें कि अमर उजाला की पड़ताल में कई पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था कि विसरा रिपोर्ट देरी से मिलने के कारण केस की जांच में देरी होती है।
फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) मधुबन के अधिकारियों ने दावा किया है कि मई 2018 से अक्तूबर 2019 तक प्रदेशभर से 3348 विसरा सैंपल लैब में आए। इनमें से 3101 केसों की रिपोर्ट समय रहते संबंधित पुलिस अधिकारियों को दे दी गई। बाकी 247 केसों का भी जल्द निपटारा कर दिया जाएगा। यही नहीं, डेढ़ साल से पहले के पेंडिंग केसों में से 2874 केस निपटाए जा चुके हैं।
रोहतक पुलिस का दावा: लैब के अधिकारियों को कराना पड़ता है याद
रोहतक पुलिस ने सोमवार को दावा किया था कि विसरा सैंपलों की निगरानी के लिए एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया गया है। इसमें हर केस की समय-समय पर जानकारी ली जाती है। विसरा रिपोर्ट के लिए एफएसएल अधिकारियों को कई दफा डीओ यानी मेल लिखनी पड़ती है। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट देरी से मिलती है।
लैब का दावा: अब नहीं होती है कोई देरी
एफएसएल मधुबन के डायरेक्टर आईपीएस श्रीकांत जाधव का कहना है कि पहले विसरा की विधि और केस निपटान की कार्यप्रणाली में जरूर समय लगता था, लेकिन अब इस स्थिति में सुधार आया है। लगातार जीरो लेवल पेंडेंसी अभियान चलाकर केस निपटाए गए हैं। भविष्य में इस प्रक्रिया में और सुधार लाया जाएगा।