रोहतक। नियम और बिजली दरों में निरंतर बदलाव हो रहा है। फिर भी उद्यमियों को बिजली की सुचारु सुविधा नहीं मिल रही है। उद्यमियों ने बताया कि रोजाना दिन में 3-4 बार घंटे भर के बिजली कट लग रहे हैं। मजबूरी में महंगे जनरेटर लगाकर काम चलाना पड़ रहा है। इससे उत्पादन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
आईएमटी में 100 से अधिक उद्यमियों ने बिजली कनेक्शन ले रखे हैं। बिजली समय अनुसार न मिलने से उद्योगों का कार्य प्रभावित हो रहा है। पर्याप्त बिजली न मिलने से काम में रुकावट के साथ-साथ नुकसान भी हो रहा है। यह समस्या लघु उद्यमियों को ही नहीं बल्कि बड़े उद्यमियों को भी हो रही है।
आईएमटी में हाईटेंशन के 45, लो टेंशन के 25 व 30 अस्थायी बिजली कनेक्शन हैं। उद्यमियों का कहना कि सरकार को आय कर, जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) व बिजली का भुगतान समय पर पूरा चाहिए। इसके बावजूद बिजली सुचारु नहीं मिल रही है।
हाल ही में, बिजली निगम ने 165 रुपये प्रति किलोवाट से बढ़ाकर 290 रुपये प्रति किलोवाट बिजली दर में वृद्धि की है। इन्हीं कारणों से उद्यमी सोलर सिस्टम लगाने को मजबूर हैं जबकि पूरे उद्योग को सोलर से संचालित करना महंगा ही नहीं, असंभव जैसा है।
सात लाख में मिलने वाला जनरेटर अब आ रहा 14 लाख में
उद्यमी जोगिंद्र नांदल ने बताया कि डीजी सेट (डीजल जनरेटर) के नियम बदल दिए हैं। जहां सात लाख में जनरेटर मिलता था उसकी कीमत पांच साल में 14 लाख तक पहुंच गई है। रेटेड उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण (आरईसीडी) के लिए अलग से खर्चा करना पड़ रहा है। ऐसा न करें तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाले जुर्माना लगा देते हैं। मशीन न चले तो उत्पादन प्रभावित होता है।
बिजली निगम के अनुसार बिजली बाधित
22 जुलाई : आईएमटी फीडर-1 में 2 घंटे
20 जुलाई : आईएमटी फीडर-1 व 2 में एक घंटे 10 मिनट
19 जुलाई : आईएमटी फीडर-2 में 15 मिनट
18 जुलाई : आईएमटी फीडर-1 में 30 मिनट
18 जुलाई : आईएमटी फीडर-2 में 40 मिनट
18 जुलाई : आईएमटी फीडर-4 में 20 मिनट
15 जुलाई : आईएमटी फीडर-1 में 35 मिनट
15 जुलाई : आईएमटी फीडर-2 में 35 मिनट
15 जुलाई : आईएमटी फीडर-5 में 45 मिनट
14 जुलाई : आईएमटी 11 केवी लाइन की एक घंटे
13 जुलाई : आईएमटी-1 व 2 की 2 घंटे 45 मिनट
नोट : बिजली निगम के अुनसार, यहां जंपर टूटने व फॉल्ट की समस्याओं का सुधार किया गया।
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मेन लाइन बंद होने और ब्रेकडाउन के कारण ही बिजली सप्लाई रुकती है। आईएमटी में उद्योगों को सुचारु बिजली प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास रहता है। मानसून में बारिश के कारण शॉर्ट सर्किट होने की आशंका पर कुछ समय के लिए बिजली सप्लाई रोकनी पड़ती है।
-योगेश कुमार, एसडीओ, बिजली निगम।
सरकार की ओर से तरह-तरह के टैक्स लगाए जा रहे हैं। आमदनी के स्रोत कम हो रहे हैं। खर्च अधिक बढ़ रहा है। सोलर सिस्टम की मांग बढ़ी है ताकि बिजली बिल का भुगतान कम किया जा सके। अकेले सोलर सिस्टम से उद्योग चलाना असंभव है।
-अंशुल गुप्ता, उद्यमी।
50 लाख का जनरेटर और 16 लाख रुपये में आरईसीडी लगवाई। 16 लाख के बाद सोलर के लिए भी 4 करोड़ का अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। पांच-छह घंटे बिजली समस्या रहती है। जनरेटर में प्रतिमाह डीजल लगाकर 5 लाख का खर्चा करना पड़ रहा है।
-जयनारायण शर्मा, उद्यमी।
बिजली बिलों के रेट बढ़ाए जा रहे हैं जबकि बिजली की सुचारु व्यवस्था नहीं है। बढ़े बिजली बिलों से बचने के लिए एक करोड़ का सोलर सिस्टम लगाया है। इससे भी एक चौथाई लाभ होगा, फिर भी बिजली की जरूरत शत-प्रतिशत रहती है।
-राजेंद्र बसंल, उद्यमी।
अंशुल गुप्ता, उद्यमी।
अंशुल गुप्ता, उद्यमी।