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5764 करोड़ रुपये से बने देश के सबसे हाईटेक एक्सप्रेस-वे पर गड्ढे, 278 जगह झेलने पड़ रहे झटके

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उत्तर प्रदेश के बागपत में यमुना पुल के ऊपर केजीपी में हुए गड्ढे। - फोटो : Sonipat
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अंकित चौहान
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सोनीपत। कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे को भले ही देश में सबसे हाईटेक होने का दावा एनएचएआई करता हो और उसके निर्माण में 5764 करोड़ रुपये खर्च किए गए हों, लेकिन देश के सबसे हाईटेक एक्सप्रेस-वे में गड्ढे हो गए हैं। इस एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालकों को 278 जगहों पर झटके झेलने पड़ रहे हैं।
झटके भी ऐसे होते है कि अगर गाड़ी की स्पीड ज्यादा हो तो गाड़ी उछलने से कंट्रोल नहीं होने पर हादसा हो सकता है, क्योंकि एक्सप्रेस-वे पर अभी तक काफी जगह गड्ढे भरे नहीं गए हैं तो जिन जगहों पर दरार आ गई थी, वहां उनको तारकोल और रोडी डलवाकर पैचवर्क करा दिया गया, लेकिन उनका लेवल सीमेंट वाली सड़क से काफी ऊपर पहुंच गया है, जबकि केजीपी पर रोजाना लगभग 80 हजार वाहनों से एक करोड़ रुपये का टोल टैक्स वसूला जा रहा है।
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कुंडली से गाजियाबाद होते हुए पलवल तक 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे की हालत डेढ़ साल में बिगड़नी शुरू हो गई है। कुंडली से शुरू होने वाले एक्सप्रेस-वे पर कई जगह गड्ढे बने हुए हैं तो काफी जगह दरार आ गई है। एक्सप्रेस-वे के अंडरपास की जगह वाली सड़क पर दरार काफी बढ़ गई है और वहां से सड़क भी काफी ज्यादा टूटने लगी है। इस तरह किसी एक जगह ही एक्सप्रेस-वे की हालत खराब नहीं है, बल्कि एक्सप्रेस-वे पर कुंडली से पलवल तक 278 जगहों पर वाहन दौड़ाने पर झटके झेलने पड़ते है। केजीपी पर वाहनों की रफ्तार 80-120 किमी तय की हुई, लेकिन इस पर वाहन का तय रफ्तार पर भी दौड़ाना खतरे से खाली नहीं है। पीएम ने डेढ़ साल पहले किया था उद्घाटन
एनएचएआई के अफसर इस एक्सप्रेस-वे को देश में सबसे हाईटेक होने का दावा करते हैं, जिसके निर्माण में 5764 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह पहला एक्सिस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे है, जिस पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था, सौर ऊर्जा सिस्टम, कला एवं संस्कृति को दर्शाते कलाकृतियों आदि के बारे में बताया गया है। इसके साथ ही देश की पहली डिजिटल आर्ट गैलरी भी बनाई गई है। इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 27 मई 2018 को पीएम नरेंद्र मोदी से कराया गया था। इसके उद्घाटन के डेढ़ साल बाद ही हालत बिगड़नी शुरू हो गई है और सीमेंट के साथ ही काफी जगह पैचवर्क होने से सामान्य सड़कों की तरह तारकोल वाला हाईवे बनता जा रहा है।
हर दिन लगभग 80 हजार वाहन गुजर रहे, एक करोड़ वसूल रहे टोल टैक्स
दिल्ली के अंदर से जाम और प्रदूषण कम करने के लिए यह एक्सप्रेस-वे बनाया गया था, जिससे वाहन इस पर दौड़ने से लोगों का समय भी बच सके। उसका असर भी काफी दिखाई दिया और इस समय लगभग 80 हजार वाहन रोजाना एक्सप्रेस से गुजरते हैं, जिनमें हरियाणा, उत्तरप्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात समेत अन्य प्रदेशों के वाहन शामिल हैं। इन वाहनों से रोजाना लगभग एक करोड़ रुपये टोल टैक्स वसूल किया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से एक्सप्रेस-वे पर सफर करने में वाहन चालकों को झटके लग रहे हैं, उसको देखते हुए पूरा टोल वसूले जाने के बाद भी सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है।
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सभी समस्याओं को दूर किया जा रहा है
कुंडली-गाजियाबाद-पलवल ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर कुछ जगह ज्वाइंट खुलने के साथ ही दरार वाली समस्या आई है। उनको ठीक कराया जा रहा है और एक्सप्रेस-वे पर जितनी भी समस्याएं हैं, उनको जल्द ही पूरी तरह से ठीक करा दिया जाएगा, जिससे वाहन चालकों को कोई परेशानी नहीं हो सके।
-प्रशांत संधु, टेक्निकल मैनेजर एनएचएआई
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