रोहतक। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ प्रफोर्मिंग आर्ट्स (हिपा) की ओर से स्वतंत्र मंच पर नाटक ''किस्सागोई 2'' का मंचन किया गया।
सरकार के कला और संस्कृति कार्य विभाग की ओर से प्रायोजित व विश्वदीपक त्रिखा की ओर से निर्देशित इस प्रस्तुति में आम आदमी के जीवन के व्यक्तिगत संकोच को बेहद रोचक एवं भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। नाटक में दिखाया गया है कि एक साधारण व्यक्ति प्रेम, घृणा, तिरस्कार और उपेक्षा जैसी संवेदनाओं को किस प्रकार अनुभव करता है।
वह संकोचवश अपने इन अनुभवों को जीवनभर सबसे छिपा कर रखता है, जबकि सबको इनके बारे में पता होता है। एक घंटे तक चली नाट्य प्रस्तुति में विश्वदीपक त्रिखा ने अपने भावपूर्ण अभिनय से अंत तक दर्शकों को बांधे रखा। सुजाता और विकास ने भी प्रभावित किया। जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी संजीव सैनी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे। नाटककार एवं निर्देशक विभांशु वैभव विशिष्ट अतिथि रहे। नाट्य संध्या का उद्घाटन दीप प्रज्वलन से हुआ।
नाटक तब और भी सार्थक लगा जब नाटक का पात्र पति कहता है कि देशभर का डाटा यह बताता है कि 85 प्रतिशत पति-पत्नी एक दूसरे से प्यार नहीं करते। वे अक्सर एक-दूसरे से झगड़ते रहते हैं। इसके बावजूद हमारी आबादी बढ़ कर चीन से अधिक हो गई और हम नंबर एक पर आ गए। अगर पति-पत्नी एक दूसरे से सच में प्यार करते होते, तो निश्चित ही हम चीन की आबादी से दोगुने हो गए होते। इंसानी रिश्तों पर आधारित यह नाटक दर्शकों के दिल को छूने में कामयाब रहा। हर व्यक्ति को यह लगा, जैसे यह उसी की अपनी कहानी है।
नाटक ''किस्सागोई'' एक आम आदमी की वास्तविक जिंदगी और इच्छाओं के बारे में बात करता है। नाटक का मुख्य पात्र कहता है कि शादी से पहले पति-पत्नी प्यार की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। वे कहते हैं कि एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। वहीं शादी के 2 साल बाद वे एक दूसरे के साथ रहना भी पसंद नहीं करते और सीधे तौर पर कह देते हैं कि मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता या मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती। रिश्तों में कमी कहां से आती है, क्यों आती है, इन्हीं सब बातों को लेकर नाटक का आलेख विश्व दीपक त्रिखा ने लिखा और इसमें पति की भूमिका भी खुद ने निभाई। प्रेमिका की भूमिका सुजाता ने और प्रेमी की भूमिका विकास रोहिल्ला ने निभाई।
मंचन के दौरान कपिल सहगल, वीरेंद्र मधुर, संजय राठी, आरके रोहिल्ला, डॉ. हरीश वशिष्ठ, विक्रमादित्य, रवि रविंद्र, शक्ति सरोवर त्रिखा, गुलाब सिंह खांडेवाल, मनीष खरे, इंदरजीत सैनी, पंकज शर्मा, पवन गहलौत, यतिन वधवा, अभिषेक, हैरी रंगा, विष्णु मित्र, अनिल शर्मा, गर्व कोचर सहित अनेक रंगकर्मी और नाट्य प्रेमी उपस्थित रहे।