कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर संगठनों ने शुक्रवार को चक्का जाम किया। इस दौरान जिले से गुजरने वाले सभी हाईवे पर सुबह छह से शाम छह बजे तक आवाजाही बिल्कुल ठप रही। कई जगह गांवों की लिंक सड़कें भी बंद रहीं। एंबुलेंस, डॉक्टर, मरीज और परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को जाने दिया गया। किसानों की अपील पर शहर में कुछ दुकानदारों ने कुछ समय के लिए दुकानें भी बंद रखीं। ज्यादातर दोपहिया वाहन ही जाम में फंसे। सभी जगह पुलिस मुस्तैद रही लेकिन राहगीरों और प्रदर्शनकारियों के बीच खास झड़प नहीं हुई।
जिले से दिल्ली, जींद, झज्जर, भिवानी, सोनीपत और पानीपत को जाने वाले राजमार्ग कई जगह बंद किए गए। दिल्ली रोड पर खरावड़ और सांपला, जींद रोड पर जींद चौक, टिटोली और लाखनमाजरा, हिसार रोड पर बहुअकबरपुर, मदीना, महम, भिवानी रोड पर भाली आनंदपुर चीनी मिल, झज्जर रोड पर डीघल टोल प्लाजा, पानीपत रोड पर मकड़ौली टोल प्लाजा और सोनीपत रोड पर भालौठ के पास किसानों ने चक्का जाम किया। इसके अलावा सुनारिया, ककराना, बालंद, चिड़ी, निंदाना आदि गांवों के पास भी किसानों ने सड़कों पर आवाजाही बंद की। मकड़ौली टोल पर किसानों का धरना पहले से चल रहा है। वहां ट्रैक्टर और ट्रक लगाकर टोल के सारे रास्ते बंद कर दिए गए। दोपहर 12 बजे तक यहां से करीब 15 एंबुलेंस को निकाला गया। कुछ बाइक सवारों के साथ प्रदर्शनकारियों की हल्की बहस हुई, लेकिन जिसे वाकई जरूरत थी, उसे ही जाने दिया गया। वे गांवों के रास्तों से होकर अपने गंतव्य तक गए। परीक्षा के लिए जाने वालों के एडमिट कार्ड देखे गए। टिटोली में सुबह छह बजे से चक्का जाम हो गया था। लेकिन करीब दस बजे किसानों ने शहर में स्थित जींद चौक को भी बंद कर दिया। दोपहर में किसानों का एक दल सुभाष चौक से मेडिकल मोड़ की तरफ गया। रास्ते में उन्होंने दुकानदारों से विनम्रतापूर्वक अपील की कि उनका सहयोग करें। इसके बाद कई जगह दुकानें कुछ देर के लिए बंद कर दी गई। भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश प्रधान अनिल नांदल ने कहा कि जाम के दौरान किसी भी आपातकालीन सेवा को नहीं रोका गया। जब तक सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेगी, इसी तरह शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन जारी रहेंगे। विभिन्न जगहों पर चक्का जाम में संगठन के रणधीर काला, प्रेम लता, कविता, कलावती श्रुति अंग्रेजो देवी, धर्मवीर आदि शामिल हुए।
किसानों ने रखा जाम, बाजार भी रहे बंद
महम। चक्का जाम महम में पूरी तरह असरदार रहा। किसानों ने क्षेत्र से गुजरने वाले अधिकतर रास्तों को बंद रखा। शहर के बाजार पूर्णतया बंद रहे। सुबह जल्दी ही किसान नेशनल हाईवे तथा स्टेट हाईवे पर आ जमे थे। भैणीमहाराजपुर, खरकड़ा, मदीना तथा बहुअकबरपुर आदि सभी गांवों में हाईवे पर किसान मौजूद थे। इसके अतिरिक्त स्टेट हाईवे पर सीसर, निंदाना, बैंसी तथा लाखनमाजरा में भी किसानों ने जाम रखा। स्थानीय दुकानदारों ने भी दुकानें बंद रखी। किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने बाजारों में रोष प्रदर्शन किया तथा सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। इस बीच नेशनल हाईवे तथा स्टेट हाईवे पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई।
लाखनमाजरा बाजार भी बंद
लाखनमाजरा। चक्का जाम के दौरान लाखनमाजरा का मुख्य चौक पूरी तरह बंद रहा। व्यापारियों ने भी भारत बंद का समर्थन किया और पूरा बाजार बंद रहा। सुबह 6 बजे से पहले ही किसान चौक पर जमा होने शुरू हो गए थे और देखते ही देखते रास्ता बंद कर दिया गया। उन्होंने सभी वाहन चालकों से अपील की कि आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आएगी, अपने वाहन यहां न खड़े करें। सभी वाहन चालकों के बैठने और खाने-पीने का प्रबंध किया गया था, चौक पर खड़े वाहनों की सुरक्षा को बीस वालंटियर तैनात किए गए थे। दिन भर मुख्य चौक पर गीत, संगीत और रागिनी का दौर चलता रहा। चक्का जाम में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए महिलाओं ने गीतों के माध्यम से कृषि कानूनों का नुकसान बताया। मंच संचालन पांच साल के बच्चे ने किया और अपने नारों से जोश भर दिया। कानूनों की प्रतियों की होली जलाई गई।
पूरी तरह बंद रहा सांपला
कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का सांपला में पूरा असर रहा। यहां सड़कें तो बंद थी ही, बाजार भी पूरी तरह बंद रहे। शाम छह बजे के बाद कुछ दुकानें खुली। सुबह एक बार तो बाजार खुला लेकिन किसानों की अपील के बाद दुकानें बंद कर दी गईं। कुछ किसानों ने मुख्य चौक पर धरना देकर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। थाना प्रभारी राजेंद्र बूरा के समझाने पर किसान वहां से उठकर टोल पर चले गए। चक्का जाम के चलते जरूरी कामों से जाने वालों को गांवों की सड़कों से होकर जाना पड़ा।