रोहतक। बारिश के पानी की निकासी के लिए जिले में बनाए गईं ड्रेनों की हालत ठीक नहीं है। ग्रामीण इलाकों में ड्रेनें जहां फुल चल रही हैं वहीं शहर के साथ में लगती ड्रेनें जलकुंभी से अटी हुई हैं। ड्रेन नंबर-4 में जलकुंभी इतनी अधिक हो गई है कि पानी की निकासी नहीं हो पा रही है।
इसके अलावा मानसून से पहले लगाया गया पंप हाउस अभी तक चालू नहीं हो सका है। उसका अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं जारी किया गया है। जिला की प्रशासन की ओर से बाढ़ से बचाव के लिए किए जा रहे दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
जिले में बारिश के पानी की निकासी के लिए 90 ड्रेनें हैं। ग्रामीण इलाकों में ड्रेन व बांध टूटने की शिकायतें आ रही हैं। शहर से बारिश के पानी की निकासी के लिए ड्रेन नंबर 8 अहम है। इसमें पानी डालने के लिए अन्य छोटी ड्रेनों की मदद ली जाती है। इनमें भी जलस्तर बढ़ा हुआ है। इन ड्रेनों की स्थिति भी खराब है। मौसम विभाग की ओर से प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट है।
मकड़ौली लिंक ड्रेन फुल चल रही है। इस ड्रेन में कहीं मिट्टी डालकर अवरोधक बनाया गया है तो कहीं पेड़ और कचरे से अटी हुई है। ऐसे में लगातार बारिश मुश्किल बढ़ा सकती है। मकड़ौली लिंक ड्रेन का पानी पीर बोधी तालाब में आने से शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
शहर से पानी निकासी के लिए 8 नंबर के बाद चार नंबर की ड्रेन महत्वपूर्ण है। इसकी सफाई के बाद भी यह पहले की तरह कचरे से अटी नजर आ रही है। ऐसे में सफाई के नाम पर खानापूर्ति किए जाने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। दोनों ड्रेनों में 1 से 3 फीट ही गहराई शेष है। इस पर भी जलकुंभी उगी हुई है।
इधर, ड्रेन नंबर-8 में भी पानी किनारों से दो से चार फीट नीचे चल रहा है। इसमें भी भारी मात्रा में जलकुंभी व टूटे पेड़ अवरोधक बने हुए हैं। अगर यह ड्रेन ओवरफ्लो होती है या टूटती है तो शहर के लिए चिंतनीय बन सकती है।
सुंदरपुर पंप हाउस पर न मोटरें लगीं, न बिजली कनेक्शन मिला
सुंदरपुर गांव में ड्रेन नंबर 8 के पास ड्रेन नंबर चार पर बनाया गया पंप हाउस अभी तक चालू नहीं हो पाया है। यहां न तो मोटरें लगी हैं और न ही बिजली का कनेक्शन मिला है। बिजली निगम ने जून में यहां पर पंप हाउस रखे गए थे मगर तेज आंधी में वे गिर गए हैं। खंभे टूट गए हैं। उन्होंने आज तक सही नहीं किया गया है। इसकी वजह से न पंप चालू हो पा रहा है न ही पानी की निकासी हो पा रही है।
बाढ़ से बचाव के लिए हर तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं। ड्रेनों की निगरानी के लिए अधिकारियों की टीमें गठित की गई हैं। संबंधित अधिकारियों से लगातार हालात के फीडबैक लिए जा रहे हैं। -सचिन गुप्ता, जिला उपायुक्त।
ड्रेन-4 के शटर को पूरी तरह से नहीं खोला गया है। ड्रेन में बारिश का पानी फुल है। ड्रेन पूरी तरह से जलकुंभी से भरी हुई हैं। जलस्तर बढ़ने पर खेत डूब सकते हैं। - राजकुमार, सुंदरपुर।
ड्रेन-8 से लगते दर्जनों गांव हैं। इसके अंदर पेड़ टूट कर गिरे हुए हैं। जलकुंभी उगी हुई है। सफाई पूरी तरह से नहीं की गई। लगातार बारिश होती रही तो बांध टूटने पर 1995 जैसे हालात हो सकते हैं। -हरकिशन, सिसरौली।
शहर से बारिश के पानी की निकासी के लिए ड्रेन नंबर-4 का अहम योगदान है। ड्रेन-4 से पानी लिफ्ट करके ड्रेन-8 में डालने के लिए पंप सेट अभी तक चालू नहीं हुआ है। ट्रांसफाॅर्मर टूटने के बाद अभी तक नहीं लगे हैं। -मुकेश, गांव सुंदरपुर।
राजकुमार, सुंदरपुर।
राजकुमार, सुंदरपुर।
राजकुमार, सुंदरपुर।
राजकुमार, सुंदरपुर।