सचिन व्यापारी ने बताया कि रोहतक की रेवड़ी-गजक का स्वाद देशभर में अलग पहचान रखता है। इसकी वजह यहां की नहर का पानी और चीनी मिल मानी जाती है। पहले जहां कुछ ही लोग यह कला जानते थे आज 50 से 60 कारीगर इस पारंपरिक काम से जुड़े हैं।
देसी घी, तिल, चीनी, पिस्ता, बादाम और छोटी इलायची से बनी रेवड़ी-गजक 2 से 3 महीने तक खराब नहीं होती क्योंकि चीनी को अंतिम चरण तक पकाया जाता है।
ऐसे शुरू हुआ रेवड़ी-गजक का कारोबार
मुस्लिम कारीगरों ने हिंदू व्यापारियों को रेवड़ी बनाना सिखाया। उस समय रेवड़ियां आकार में काफी बड़ी बनती थी। 1947 के बंटवारे के बाद हालात बदले और कारीगर अलग-अलग हो गए। इसके बाद 1975-77 की इमरजेंसी में रोहतक के पुराने बाजार की पूरी एक लेन की दुकानें तोड़ दी गई, जिससे यह कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालांकि समय के साथ कारीगरों ने दोबारा मेहनत कर इस परंपरा को जिंदा रखा।
5 करोड़ का कारोबार, देश-विदेश तक सप्लाई
दशहरा से लोहड़ी तक का समय इस कारोबार के लिए सबसे अहम माना जाता है। सालाना करीब 5 करोड़ रुपये का कारोबार होता है और सीजन में लगभग 15 टन उत्पादन किया जाता है। रोहतक की रेवड़ी-गजक अब सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रही। यहां से तैयार माल दिल्ली के पीतमपुरा, पूरे हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सप्लाई किया जाता है। कनाडा, अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया में भी रेवड़ी गजक भेजी जा रही है। ठंड में अन्य राज्यों से बड़े ऑर्डर आते हैं और पैकिंग इस तरह की जाती है कि मिठास लंबे समय तक बनी रहे।
कई वैरायटी, अलग-अलग दाम
पुराने बाजार में इस समय रेवड़ी-गजक की कई वैरायटी उपलब्ध हैं।
पिस्ता रेवड़ी: 420-480 रुपये प्रति किलो
सादा रेवड़ी: 300-350 रुपये प्रति किलो
गुड़ रेवड़ी: 280-320 रुपये प्रति किलो
गुड़ खस्ता गजक: 320-380 प्रति किलो
घी खस्ता: 400-450 प्रति किलो
बादाम पट्टी: 450-550 प्रति किलो
शालीमार गजक: 380-420 प्रति किलो
मंजू रोल, गुड़ रोल, सादा रोल: 300-400 प्रति किलो
गुड़ समोसा: 300-350 प्रति किलो
24. बड़ा बाजार में कारीगर देसी घी और चीनी को कढ़ाही में पकाकर रेवड़ी-गजक तैयार करते हुए। संवाद