02सीटीके06.....माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा व प्रज्वलि
रोहतक। माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर की नींव गोकर्ण महंत बाबा लक्ष्मणपुरी के हाथों सन 1991 में रखी गई। यह मंदिर 33 वर्ष पुराना है। तीन मई 2016 तक ब्रह्मलीन गुरुमां साध्वी गायत्री मंदिर की संचालिका थीं। 17 मई 2016 को उनकी गद्दी साध्वी मानेश्वरी ने संभाली।
निरंतर 33 साल से मंदिर में मां दुर्गा की अखंड ज्योति नवरात्रों में 24 घंटे जलती है। यहां वर्ष में पड़ने वाले चारों नवरात्र भक्तिभाव से मनाए जाते हैं। नवरात्र में शाम 4 से 6 बजे प्रतिदिन दुर्गा स्तुति का पाठ और साध्वी मानेश्वरी देवी के प्रवचन होते हैं। सुबह-शाम आरती और कीर्तन होता है। ब्रह्मलीन गुरुमां साध्वी गायत्री तो नवरात्रों में मौन रहा करती थीं। वह 9 दिन तक मौनव्रत रखती थीं। कोई बात कहना हो तो कागज पर लिखकर बताती थीं।
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मंदिर को लेकर यह है किंवदंती
संकट मोचन मंदिर यह किंवदंती प्रचलित है। मंदिर में भक्त बीरबल 2001 से आना शुरू किया था। उस समय वह भयंकर बीमारी, कर्ज, परेशानी और विपत्तियों में था। जिस दिन से उन्होंने संकट मोचन मंदिर में गुरु की शरण ली, तब से उनके जीवन में बड़ा चमत्कार हुआ। वह कारोबारी बन गए। उन्हें हर बीमारी और कर्ज से निजात मिल गया। उनका कहना है कि यह सब संकट मोचन मंदिर में गुरु के शरण में आने और बजरंग बली हनुमान की कृपा से हुआ है।