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Rohtak News: पाकस्मा की मिट्टी ने दिए वैज्ञानिक, शिक्षक और अफसर

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10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण। - फोटो : Samvad
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रोहित राठौर
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रोहतक। गांव पाकस्मा केवल अपनी करीब 800 वर्ष पुरानी विरासत के साथ यहां की मिट्टी से निकली प्रतिभाओं के लिए भी जाना जाता है। गांव के लोगों ने विज्ञान, प्रशासन, शिक्षा और चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
ग्रामीणों के अनुसार पाकस्मा क्षेत्र के सबसे शिक्षित गांवों में गिना जाता है। यहां 10वीं तक का विद्यालय आसपास के गांवों में सबसे पहले शुरू हुआ था। करीब 80 वर्ष पूर्व गांव में बड़े स्तर पर आर्य समाज सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इसमें 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
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ग्रामीण जिले सिंह ने बताया कि गांव ने फार्माकोलॉजी के वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रामधारी, गेहूं की विभिन्न किस्मों के विकास में योगदान देने वाले वैज्ञानिक डॉ. रामकुमार राणा तथा स्टेट कैडर के आईपीएस अधिकारी डॉ. बलवान सिंह राणा नायक दिए।
आजाद सिंह रोहिला ने बताया कि वर्ष 1952 में चौधरी मौजीराम शर्मा गांव के पहले सरपंच बने थे। उन्होंने सड़क निर्माण और शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं वैद्य मनके राम ने आयुर्वेद और सशस्त्र बलों में सेवाएं देकर समाज के लिए मिसाल कायम की। गांव आज भी अपनी गौरवशाली विरासत और प्रतिभाओं के बल पर नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहा है।
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ये भी हैं गांव की हस्तियां :
पूर्व सरपंच मुकेश राणा बताते हैं कि गांव से एचईएस ब्रह्म प्रकाश राणा, एमडीयू प्रोफेसर डाॅ. अमित, प्रोफेसर डाॅ. रामकरण, सीआरपीएफ एसएसपी राजसिंह, सीआरपीएफ एसएसपी सुरेश, कर्नल आर्मी जोगेंद्र, विंग कमांडर एयरफोर्स बिजेंद्र, हेडमास्टर एग्रीकल्चर हिसार डाॅ. महासिंह, डाॅ. एमडीयू प्रोफेसर भगवान, आर्मी अमित राणा, एयरफोर्स स्क्वाड्रन अंजू राणा व डीएसपी महेंद्र सिंह राणा आदि महानुभावों ने गांव का नाम प्रदेश व देश में रोशन किया है।

फोटो : 04
पिता चौधरी मौजीराम गांव के सबसे पहले सरपंच बने। उन्होंने सड़क निर्माण और शिक्षा को नई दिशा देने में अपना योगदान दिया।
- कृष्ण, प्रधान, 14 राणा खाप।

फोटो : 05
पाकस्मा गांव आर्य समाज से बहुत प्रभावित था। 80 साल पहले उत्तर भारत का आर्य समाज सम्मेलन भी हुआ। इसी प्रेरित होकर दादा भरत सिंह ने गांव में प्राथमिक पाठशाला का निर्माण करवाया व जमीन दी थी।
- नरेंद्र राणा, भरत सिंह नंबरदार के पौत्र।
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फोटो : 06
चाचा डॉ. रामधारी ने पशु चिकित्सा में अच्छा काम किया है। सेवानिवृति के बाद आज वह सीकर में काम कर रहे हैं। इनकी बेटियां विदेश में रह रही हैं।
- राजेश राणा, डॉ. रामधारी के परिजन।
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फोटो : 07
मेरे ताऊ रामकुमार राणा ने हिसार कृषि विश्वविद्यालय में अनेक शोध किए। ताऊ रामकुमार राणा ने कृषि क्षेत्र से उन्होंने पीएचडी की। अब सेवानिवृति के बाद हिसार रहते हैं।
- दीपक राणा, डॉ. राम कुमार के परिजन।

फोटो : 08
हमारे परिवार में बड़े भाई कृष्णा के लड़के डाॅ. बलवान आज गुरुग्राम में पुलिस विभाग में डीआईजी हैं। फौज में 5 साल सेवाएं देने के बाद
वो हरियाणा पुलिस में आए।
- ओम सिंह राणा, आईपीएस डॉ. बलवान सिंह के परिजन।
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फोटो : 09
गांव में कर्नल निहाल सिंह अंग्रेजों के समय के मेजर ज्ञानी गांव में चर्चित रहे हैं। गांव में शिक्षा का विस्तार करने में पंडित नानक का नाम याद आता है। उन्होंने 10वीं तक स्कूल करवाया था।
- मुकेश राणा, पूर्व सरपंच, पाकस्मा।
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फोटो : 10
वैज्ञानिक डॉ. रामकुमार राणा ने गेहूं की अनेक किस्म तैयार की। गांव वालों के लिए भी उन्होंने खेती और कृषि के अपना पूरा योगदान दिया। गांव में नीम का वृक्ष इतना बड़ा था कि कोई नहीं चढ़ पाया।
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- बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

10 बिजेंद्र सिंह राणा, ग्रामीण।- फोटो : Samvad

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