रोहतक। मुनमुन की छत पर बनी बगिया से आसमां महक रहा है। जसबीर कॉलोनी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मुनमुन हजारिका की बगिया में सब्जियां और फूल एक साथ होने से यह न केवल सुंदर दिखती है बल्कि घर को ताजगी और जैविक बागवानी उत्पाद भी मिल रहे हैं।
उन्होंने 10 साल पहले बगिया बनाई थी जिसमें अब 150 से अधिक पौधे लगाए हुए हैं। मूल रूप से असम की रहने वाली मुनमुन हर मौसम में खुद ही पौधों की देखभाल करती हैं। पति संदीप के साथ जब भी अपने मायके में असम जाती हैं तो वहां से कोई न कोई पौधा जरूर लाती हैं।
असम की जलवायु में होने वाले कई प्रकार के घरेलू पौधे उन्होंने अपनी बगिया में लगाए हुए हैं। इतना ही नहीं वे इन पौधों को रिश्तेदारों व जानकारों को गिफ्ट भी देती हैं। बगिया की देखरेख में संदीप भी सहयोग करते हैं। मुनमुन की शादी 2007 में रोहतक की जसबीर काॅलोनी निवासी संदीप के साथ हुई थी, संदीप मूल रूप से कैथल के रहने वाले हैं।
शादी के बाद से ही वे रोहतक में रहते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ ही मुनमुन गृहिणी भी हैं। बेकार की बोतलों और बर्तनों का उपयोग करके उन्होंने इस बगिया को सुंदर बनाया है। संवाद
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बगिया में इन प्रजातियों के पौधे
तीसरी मंजिल की छत पर बनी बगिया में लगाए 150 से अधिक पौधों में गुलदाउदी, गुलाब, गेंदा, डेलिया, लिली, पेंसी, चंपा, पेटुनिया, ऑर्किड आदि प्रजातियों के फूल लगाए हैं। इनके अलावा फूलगोभी, पत्ता गोभी, टमाटर, हरी मिर्च, बैंगन, पालक, हल्दी, ब्रोकली, कड़ी पत्ता, चुकंदर, आलू, गाजर, मूली, बोक चॉय आदि सब्जियां लगाई हैं। वहीं, ड्रैगन फ्रूट, नारंगी, अनार, नींबू, अमरूद आदि फलों के पौधे भी लगाए हैं। औषधीय पौधों में तुलसी, पुदीना, पत्थरचट्टा, ग्वारपाठा, काली हल्दी आदि शामिल हैं।
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शादी में मां ने गिफ्ट में दिया था एरिका पाम का पौधा
एमए पास मुनमुन बताती हैं कि बगिया के फूल-पौधों व सब्जियों के प्रति उनकी रुचि बचपन से ही है। उनके घर आंगन में भी बगिया है। जब शादी हुई तो उनकी मां मिनोती हजारिका ने एरिका पाम का पौधा उन्हें गिफ्ट किया था जो उनके लिए खास है। मनी प्लांट भी वे मायके से ही लाई थीं। यह पौधा अब काफी बड़ा हो गया है। कैक्टस की प्रजातियों के भी विभिन्न पौधे लगाए हुए हैं। घर के किचन के अपशिष्ट पदार्थों से वह खाद तैयार करती हैं। जरूरत पड़ने पर गोबर खाद का प्रयोग भी करती हैं।
मायका असम से ही लाती हैं ज्यादातर पौधे
वह ज्यादातर पौधे अपने मायका असम से ही लाती हैं। असम से यहां लाए गए पौधों में मुख्य रूप से परवल की प्रजाति का कुंदरू, एयर पोटेटो की बेल व खुशबूदार गोल मिर्च के पौधे वह असम से ही लेकर आई थीं। टमाटर जैसी खटाई के लिए फिश मिंट का पौधा भी वहां से लाई थीं। करीब 8 साल पहले असम से आर्किड का पौधा लेकर आई थीं जो उनके लिए खास है। गोल मिर्च का पौधा वह साल पहले लाई थीं।
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