रोहतक। चार साल पहले चुलियाना की नवविवाहिता असम निवासी अनु को दहेज उत्पीड़न के चलते आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया या नहीं, पुलिस अदालत में साबित नहीं कर सकी।
अदालत में जब वकील ने पूछा कि कमरा अंदर से बंद था तो शव नहर में कैसे पहुंच गया। इसका पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था। साक्ष्यों के अभाव में एएसजे संदीप दुग्गल की अदालत ने अनु के पति बिजेंद्र, सास दर्शना व ससुर अनार सिंह को बरी कर दिया। बचाव पक्ष के वकील सुशील पांचाल ने बताया कि जींद के रायचंदवाला निवासी सुनीता ने अप्रैल 2021 में शिकायत दी कि वह असम के बोको कोरमारी कारमरूप ओकोम की रहने वाली है। नौ साल पहले उसकी शादी हरियाणा में हुई थी। पति जोगेंद्र ने कहा कि रिश्तेदारी में चुलियाना निवासी बिजेंद्र की शादी करवा दे। दिल्ली के मंदिर में अनु की शादी बिजेंद्र से करवा दी। अनु रिश्ते में बहन लगती थी। शादी के करीब 15 दिन बाद ही अनु उसके घर आई। बताया कि उसका पति शराब पीकर मारपीट करता है। सास दर्शना भी पीटती है। 9 अप्रैल को बिजेंद्र की बहन प्रमिला ने सूचना दी कि अनु ने फंदा लगा जान दे दी है। वह पति सहित पहुंची तो पता चला कि सबूत मिटाने की नीयत से शव डीघल के पास नहर में फेंक दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने, दहेज हत्या का आरोप पत्र दाखिल किया।