माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। अदालत ने यह कहकर पौत्र की याचिका खारिज कर दी कि वसीयत में मिली प्रॉपर्टी को पुश्तैनी नहीं माना जा सकता। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत हिंदू समाज में परिवार के मुखिया को प्रॉपर्टी बेचने से रोका नहीं जा सकता। याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
कलानौर खंड के गांव निगाना निवासी के एक नाबालिग बेटे ने 2019 में अदालत में अर्जी दायर की थी कि उनके पिता का देहांत हो चुका है। उनके दादा के नाम 61 कनाल जमीन है जो पुश्तैनी है। दादा अपनी जमीन को बेचना चाहते हैं। अगर जमीन बेचते हैं तो उसका हिस्सा भी चला जाएगा। उनके दादा को जमीन बेचने से रोका जाए।
अदालत में सुनवाई के दौरान दादा ने वकील के माध्यम से बताया कि वह चार भाई हैं। पिता ने चारों भाइयों के नाम वसीयत करवाई थी। वकील ने कहा कि वसीयत में मिली जमीन पुश्तैनी नहीं हो सकती, जिस व्यक्ति के नाम जमीन होती है उसके ऊपर उसी का अधिकार होता है। वह चाहे तो जमीन बेच सकता है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि दादा के नाम जमीन किसी अन्य ने नहीं बल्कि उनके पिता ने करवाई थी जो उनको पुश्तैनी तौर पर मिली थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सिविल जज अमनदीप की अदालत ने शनिवार को फैसला दिया।
कोर्ट ने माना कि वसीयत में मिली जमीन पुश्तैनी नहीं। दूसरा सुप्रीम कोर्ट ने 1988 में निर्णय दिया था कि हिंदू समाज में परिवार के मुखिया (कर्ता) को परिवार चलाना होता है इसलिए वह जमीन बेच सकते हैं। परिवार के दूसरे सदस्य उनके निर्णय को चुनौती दे सकते हैं।