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रजिस्ट्री से पहले जमा करवाना होगा बकाया सॉलिड वेस्ट यूजर चार्ज

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शहर में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाना आम आदमी के लिए और महंगा हो गया है। अब विकास शुल्क व प्रॉपर्टी टैक्स के अलावा बकाया सॉलिड वेस्ट यूजर चार्ज भी देना होगा। यूजर चार्ज 2017 से वसूला जाएगा। अगर आपने पहले भर दिया और अब रसीद नहीं है तो दोबारा शुल्क भरना पड़ेगा। निगम के पूर्व पार्षद व लोगों का कहना है कि सरकार आम लोगों की जेब लगातार हल्का कर रही है। विकास कार्यों के नाम पर बजट न होने की बात कही जाती है।
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मार्च 2010 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने नगर परिषद को भंग करके नगर निगम का दर्जा दिया था। तीन साल बाद 2013 में निगम का पहला चुनाव हुआ। हाउस में कांग्रेस समर्थक मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर बने। 2014 में केंद्र व राज्य में कांग्रेस की जगह भाजपा सरकार आ गई। इसका असर 2018 में हुए निकाय चुनाव पर पड़ा। निगम में भाजपा ने न केवल मेयर का चुनाव जीता, बल्कि 22 में से 8 पार्षद जीतकर आए। बाद में कांग्रेसी व निर्दलीय पार्षद भी भाजपा में शामिल हो गए। अब हाउस में 22 में से 20 पार्षद खुद को भाजपाई मानते हैं। कोरोना संक्रमण काल के नाम पर निगम जहां एक तरफ विकास कार्यों से पीछे हाथ खींच रहा है तो रजिस्ट्री के नाम पर आम लोगों की जेब पर लगातार दबाव बनाया रहा है। अगस्त 2020 में लागू एनडीसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) पोर्टल को अब दोबारा अपडेट किया गया है। इस दौरान न केवल 1 लाख 82 हजार प्रॉपर्टी आईडी पोर्टल पर डाली हैं, बल्कि प्रॉपर्टी टैक्स, विकास शुल्क के साथ अब सॉलिड वेस्ट यूजर चार्ज व फायर टैक्स का ब्योरा भी नोटिफिकेशन के साथ डाले गए हैं।
2017 में प्रस्ताव हुआ पास
शहरी निकाय विभाग ने 2011 में नोटिफिकेशन जारी करके शहर में सॉलिड वेस्ट यूजर चार्ज वसूलने के लिए रेट तय किए थे। जबकि रोहतक निगम हाउस ने 2017 में प्रस्ताव पास करके इसे लागू किया।
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मासिक सॉलिड वेस्ट शुल्क
रिहायशी संपत्ति मासिक शुल्क
: बीपीएल, ईडब्लयूएस, स्लम एरिया, बस्ती -5 रुपये
: 100 स्क्वेयर मीटर तक रिहायशी प्रॉपर्टी और हॉस्टल -40 रुपये
: 200 से 400 स्क्वेयर मीटर तक रिहायशी और हॉस्टल- 50 रुपये
: 400 स्क्वेयर मीटर से ज्यादा के रिहायशी और हॉस्टल- 100 रुपये
: ईडब्लयूएस को छोड़कर, 2000 स्क्वेयर फुट तक के अपॉर्टमेंट और फ्लैट- 50 रुपये प्रति फ्लैट
: 2000 स्क्वेयर फुट से ज्यादा बड़े फ्लैट और अपॉर्टमेंट पर - 100 रुपये प्रति फ्लैट
वाणिज्यिक संपत्ति
: 200 स्क्वेयर फीट के कवर्ड एरिया की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी- 25 रुपये
: 200 स्क्वेयर फुट से ज्यादा कवर्ड एरिया की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी- 100 रुपये
: 50 बेड तक अस्पताल, नर्सिंग होम व इनसे संबंधित इमारत पर- 1500 रुपये
: 50 से लेकर 100 बेड तक के अस्पताल व नर्सिंग होम पर - 3000 रुपये
: 100 बेड से ज्यादा अस्पतालों पर -5000 रुपये
: शॉपिंग मॉल एवं कॉम्पलेक्स, स्लॉटर हाउस, सिनेमा का कवर्ड एरिया- 0.50 रुपये प्रति स्क्वेयर फुट
: फैक्टरी और मिल्स के प्लांट एरिया पर- 0.50 रुपये प्रति स्क्वेयर फीट
: बैंक, ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, होटल- 10 कमरों तक- 500 रुपये
: 10 कमरों से ज्यादा होटल, मैरिज हॉल, होटल पर - 4000 रुपये
: 500 से ज्यादा मेंबर वाले क्लब, रेस्टोरेंट पर - 500 रुपये
: 500 से ज्यादा मेंबर के क्लब, रेस्टारेंट पर - 1000 रुपये
: पेट्रोल पंप व गैस स्टेशन पर - 1000 रुपये
शैक्षणिक संस्थान
: केंद्र व राज्य सरकार, पब्लिक सेक्टर ऑफिस, कॉम्प्लेक्स, वेलफेयर संस्थाएं- 150 रुपये
: 2 एकड़ तक सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों पर - 500 रुपये
: 2 से लेकर 5 एकड़ तक के सभी शैक्षणिक संस्थान- 1000 रुपये
: 5 एकड़ से ज्यादा के सभी संस्थानों पर - 2000 रुपये
नोट : सभी प्रकार की धर्मशाला, धार्मिक स्थल और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को यूजर चार्ज से मुक्त रखा गया है।
एडवांस यूजर चार्ज जमा कराने पर मिलेेगी 10 प्रतिशत छूट
निगम के मुताबिक रिपेयरिंग, रेनोवेशन या किसी भी प्रकार के कंस्ट्रक्शन करने के काम में मलबा हटाने के लिए 300 रुपये प्रति ट्रॉली का चार्ज देना होगा। यदि कोई प्रॉपर्टी मालिक यूजर चार्ज को एडवांस में जमा करवाता है तो उसे 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त निगम को केवल घरेलू कूड़ा ही दिया जा सकता है। मेडिकल या अतिरिक्त वेस्ट के लिए आपको खुद व्यवस्था करना होगी।
आम आदमी की जेब पर लगातार बोझ बढ़ रहा है, लेकिन विकास कार्यों के नाम पर निगम के अधिकारी कहते हैं कि पैसे नहीं है। वार्डों के अंदर सफाई तक नहीं होती। कई बार निगम के मेयर व अधिकारियों को विकास कार्यों की सूची सौंप चुके हैं, लेकिन काम नहीं हो रहे। - अशोक खुराना, पूर्व पार्षद, नगर निगम
2011 में सरकार ने सॉलिड वेस्ट यूजर चार्ज के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन अपने कार्यकाल के दौरान उसे लागू नहीं होने दिया। 2017 से 2020 तक अगर किसी ने यूजर चार्ज जमा करवा दिया, लेकिन रसीद नहीं है दोबारा वसूली का कोई औचित्य नहीं है। निगम के पास भी तो रिकॉर्ड होगा। उसका मिलान हो सकता है। यू दोबारा वसूली गैर कानूनी है।
- एडवोकेट दीपक भारद्वाज, पूर्व सचिव, जिला बार
रजिस्ट्री करवाने के लिए निगम की एनओसी अनिवार्य है। कभी निगम का पोर्टल काम नहीं करता तो कभी नियम अपडेट कर दिए जाते हैं। पूरा दिन आम लोग कभी निगम तो कभी तहसील के बीच चक्कर काटते रहते हैं। सरकार को नियम सरल बनाने चाहिए।
- वेद प्रकाश, डीड राइटर
आम लोगों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया, केवल एनडीसी पोर्टल को मुख्यालय की तरफ से अपडेट किया गया है। रोहतक निगम की ओर से 2017 से 2021 तक का यूजर चार्ज लिया जा रहा है। अगर किसी ने यूजर चार्ज जमा करवा दिया है तो उसे रसीद ऑनलाइन अपलोड करनी होगी या शुल्क जमा कराने का सुबूत दिखाना होगा।
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-जगदीश चंद्र, जोनल टैक्स ऑफिसर, नगर निगम
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