रोहतक। पीजीआई के शिशु रोग विभाग के नए विभागाध्यक्ष का मामला उलझ गया है। एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) के नियमानुसार एक व्यक्ति दो पदों पर नहीं रह सकता। ऐसे में नए अध्यक्ष पद के दावेदार को चिकित्सा अधीक्षक का पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसा नहीं करने पर विभागाध्यक्ष का मोह त्यागना होगा।
इस परिस्थिति में विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला के बाद वरिष्ठ चिकित्सक से अगले चिकित्सक को अवसर मिल सकता है। शिशु रोग विभाग में पिछले कुछ माह से उठापटक चल रही है। इसमें विभागाध्यक्ष को लेकर चिकित्सकों में घमासान मचा है। विभाग की अध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला करीब डेढ़ साल से ही मेडिकल कॉलेज भिवानी के निदेशक पद की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। वह 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होंगी। इसके बाद नए अध्यक्ष को विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
नया अध्यक्ष कौन होगा, यह भविष्य तय करेगा, मगर नए अध्यक्ष को लेकर संस्थान में चर्चा गरमाई हुई है। इसमें विभाग के सबसे वरिष्ठ डॉ. कुंदन मित्तल का नाम सबसे ऊपर है। इनके पास विवि के सीवीओ व पीजीआई के एमएस की भी जिम्मेदारी है।
ऐसे में इनके लिए विभागाध्यक्ष बनना मुश्किल हो गया है। विभाग के एक चिकित्सक ने एनएमसी नियमों का हवाला देते हुए कुलपति समेत अन्य अधिकारियों को शिकायत दी है। ऐसे में विभागाध्यक्ष को लेकर पेच फंस गया है।
संस्थान के शिशु रोग विभाग की अध्यक्ष अभी सेवानिवृत्त नहीं हुई हैं। एनएमसी के नियमानुसार नए विभागाध्यक्ष बनाए जाएंगे। - डॉ. एसके सिंघल, पीजीआई निदेशक