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हेपेटाइटिस का टीका लगने के बाद मां के गर्भस्थ शिशु तक नहीं पहुंचा संक्रमण

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हेपेटाइटिस का इलाज संभव है। गर्भवती महिलाओं को समय रहते टीका लगाकर उसके गर्भस्थ शिशु को हेपेटाइटिस का नया मरीज बनने से बचाया जा सकता है। यह हम नहीं, प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस का शोध बता रहा है। संस्थान के मॉडर्न ट्रीटमेंट सेंटर में ऐसे 70 केस हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं में समय रहते रोग की पहचान कर उसे गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा के लिए टीका लगाया गया। इन सभी केसों में संक्रमण नवजात तक नहीं पहुंचा। अमर उजाला ने संस्थान के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. प्रवीण मल्होत्रा से चर्चा की तो यह तथ्य सामने आए।
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दरअसल, पीजीआई में हर महीने औसतन एक हजार से 1100 प्रसूति होती हैं। इनमें से 10 केस हेपेटाइटिस-बी के होते हैं। इन्हें बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए टीका लगाया जाता है। पिछले तीन साल से संस्थान में इस पर शोध जारी है। अब तक एक भी बच्चा ऐसा नहीं मिला, जिसमें संक्रमण मिला हो। जबकि इन शिशुओं की मां में संक्रमण के कीटाणु ज्यादा थे। उन्हें समय रहते टीका लगाया गया। पीजीआई में ऐसे 70 केस हैं। शोध का हिस्सा बने इन केसों के अध्ययन में दवा से गर्भस्थ शिशु के सुरक्षित होने की बात सामने आई है।
हेपेटाइटिस-बी के 3-43 प्रतिशत चांस
हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए सरकार ने नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीएचसीपी) शुरू किया है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को फोकस किया गया है। एक अध्ययन के मुताबिक, देश में हेपेटाइटिस के कुल मामलों में से 50 प्रतिशत में मां से उसके शिशु में संक्रमण पहुंचा है। हेपेटाइटिस-बी के तीन से 43 प्रतिशत चांस मां से बच्चे में होने की संभावना रहती है। मां में संक्रामक कीटाणु ज्यादा होने पर यह संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में दवा देकर बीमार को बचाया जा सकता है। संक्रमित मां के नवजात शिशु का जन्म देते ही उसे इम्यूनोग्लोबिन टीका दिया जाता है।
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हेपेटाइटिस-सी होने के 3 प्रतिशत चांस
हेपेटाइटिस-सी होने के तीन प्रतिशत चांस होते हैं। इस बीमारी की गर्भवती को दवा नहीं दे सकते हैं। ऐसा करने पर दवा बच्चे के शरीर में जा सकती है। इसका शिशु पर असर पड़ सकता है। ऐसे केस को पहचान कर तीन माह तक के बच्चे को मां का दूध पिलाने के बाद दवा शुरू की जाती है।
हेपेटाइटिस पीड़ित गर्भवती महिलाओं से बच्चे में संक्रमण जाने का खतरा रहता है। अध्ययन बताता है कि 50 प्रतिशत केस गर्भवती महिलाओं से आते हैं। इसलिए सरकार ने सभी गर्भवती महिलाओं की जांच कराने की व्यवस्था की है। इससे समय रहते बीमारी का पता लगने व इलाज शुरू करना आसान हो गया है। संस्थान में 70 केसों पर किए गए शोध में सामने आया कि टीका लगाने के बाद गर्भवती से उसके बच्चे में संक्रमण नहीं पहुंचा है। इसलिए समय रहते जांच कराना व इलाज लेना जरूरी है।
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- डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, प्रभारी, मॉडर्न ट्रीटमेंट सेंटर, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, पीजीआईएमएस
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