माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। पीजीआई के फॉरेंसिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसके धतरवाल काे शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया है। इन पर पद का दुरुपयोग करने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट मीडिया में जारी करने व जांच में शामिल न होने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। इनकी 31 जनवरी को सेवानिवृत्ति होनी है।
इससे पहले संस्थान ने इन्हें चार्जशीट किया था। ऐसे में इन्हें सेवानिवृत्ति लाभ के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। इस संबंध में एचओडी से उनका पक्ष मांगा गया। इसके लिए उन्हें फोन के अलावा संदेश भेजा गया। इनका देर रात तक भी कोई जवाब नहीं आया। इस संबंध में उनके निलंबन का एक पत्र चिकित्सकों के ग्रुप में वायरल हो रहा है। हालांकि अमर उजाला इस पत्र की पुष्टि नहीं करता।
संस्था में सबसे मजबूत व अहम स्थान रखने वाले फॉरेंसिक विभाग के अध्यक्ष पिछले कुछ समय से विवादों में घिरे नजर आ रहे हैं। सेवानिवृत्ति के नजदीक पहुंचे यह चिकित्सक पिछले कुछ समय से अवकाश पर बताए जा रहे हैं। इन्हें कुछ समय पहले एक आपराधिक मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मीडिया में जारी करने व जिम्मेदारी नहीं होने के बावजूद खुद को मेडिकाे लीगल एडवाइजर बताने के मामले में चार्जशीट किया गया था।
विभागाध्यक्ष ने संस्थान को इस बारे में किसी तरह की सूचना या नोटिस नहीं मिलने की बता कही है। इसके बाद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक टीम गठित की थी जिसने अपनी रिपोर्ट दी। इसमें नोटिस उन तक पहुंचाने की बात कही गई है। इसके चलते उन्हें निलंबित किया गया है। अब विभागाध्यक्ष को अपने बचाव में जवाब देना होगा। इसके बाद ही संस्थान प्रबंधन अगला फैसला लेगा।
फॉरेंसिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसके धतरवाल को निलंबित किया गया है। इनके खिलाफ वर्ष 2015 तक के मामलों में कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल उनके जवाब का इंतजार है। इसके बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
- डाॅ. सुरेश कुमार सिंघल, निदेशक, पीजीआई