महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग में हुए शोध में जानलेवा फंगस क्रिप्टोकोकस नियोफॉर्मन्स की कमजोरी पकड़ने में सफलता मिली है, जिससे इसे प्रभावहीन करने के साथ ही इस पर दवाइयों के असर बढ़ाने में भी मदद मिली है।
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इस शोध ने एचआईवी, एड्स संक्रमित और दूसरे कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के इलाज को लेकर नई उम्मीद जगाई है। विभाग की पूर्व शोध छात्रा दीपिका कुमारी ने डॉ. रितु पसरीजा के मार्गदर्शन में एक ऐसे खतरनाक फंगस क्रिप्टोकोकस नियोफॉर्मन्स पर शोध किया है जो दुनियाभर में हजारों लोगों की मौत का कारण बनता है। न्यूरोफॉर्मंस फंगस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को तेजी से संक्रमित करता है। यह फंगस शरीर में जाकर दिमाग तक पहुंच सकता है और गंभीर संक्रमण पैदा करता है।
रिसर्च में टीम ने फंगस के अंदर मौजूद एक खास हिस्से की पहचान कर उसे कमजोर किया तो फंगस की ताकत कम हो गई। इसके बाद वह शरीर में तेजी से संक्रमण फैलाने के मामले में कमजोर पड़ गया। यही नहीं फंगस को दूर करने वाली दवाइयों का असर भी उस पर ज्यादा होने लगा।
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दवाइयों का असर बढ़ाने में मिल सकती है मदद
शोध में सामने आया कि फंगस के कमजोर होने के बाद कुछ एंटी फंगल दवाएं पहले की तुलना में ज्यादा असरदार साबित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस खोज के आधार पर ऐसी नई दवाएं विकसित की जा सकती हैं जो गंभीर फंगल संक्रमण के इलाज को अधिक प्रभावी बना सकें। डॉ. दीपिका ने बताया कि अभी कई मामलों में फंगस पर दवाइयों का असर कम हो जाता है। इससे मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो सकती है। ऐसे में यह रिसर्च भविष्य में इलाज के नए रास्ते खोल सकती है।