रोहतक। क्रिकेट, कुश्ती, कबड्डी व हाॅकी की तरह अब खो-खो के खिलाड़ी भी कॅरिअर की नई उड़ान भर सकेंगे। इसके लिए साई पहली बार खो-खो विश्व कप कराने जा रहा है। इंदिरा गांधी स्टेडियम दिल्ली में होने वाले इस आयोजन में 24 देशों की 44 टीमें हिस्सा लेंगी। विश्व कप में वैश्य महिला महाविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की शिक्षिका डॉ. मुन्नी जून बतौर मुख्य कोच हिस्सा लेंगी।
खो-खो विश्व कप के आयोजन को लेकर तैयारी जोरों पर है। खो-खो को नई पहचान व ऊंचाई देने के लिए आयोजित किए जा रहे इस विश्व कप के लिए भारतीय टीम चुनी जानी है। इसके लिए खिलाड़ियों का शिविर लगाया जाएगा। यह शिविर दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 10 दिसंबर से 11 जनवरी 2023 तक लगाया जाएगा। शिविर में देशभर से 60 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। शिविर में इनके प्रदर्शन के आधार विश्व कप के लिए खिलाड़ी चुने जाएंगे। यही देश की टीम का हिस्सा बनेंगे।
वैश्य महिला महाविद्यालय की शारीरिक शिक्षा विभाग की शिक्षिका डाॅ. मुन्नी जून विश्व कप में भारत की मुख्य कोच के रूप में शामिल होंगी। इसके लिए उन्हें विशेष रूप से चुना गया है। हरियाणा से पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय महाविद्यालय रोहतक का ध्रुव, वैश्य महिला महाविद्यालय की बिंदु व मीनू धतरवाल इस पहले विश्व वर्ल्ड कप की साक्षी बनेंगी। इनका चयन राष्ट्रीय शिविर के लिए हुआ है। संवाद
खो-खो विश्व कप होने जा रहा है। इसमें कॉलेज की ओर से मुन्नी जून, बिंदु व मीनू धतरवाल का चयन हुआ है। यह महाविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण है। इनके चयन से कॉलेज में खुशी का माहौल है।
- डॉ. रश्मि गुप्ता, प्राचार्य, महाविद्यालय।
विश्व कप के लिए लगाए गए शिविर में चयन हुआ है। वर्ष 2015 में खो-खो खेलना शुरू किया। उस समय उम्र 15 वर्ष थी। पिता नीरज निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। मां गृहिणी हैं। छोटा भाई पढ़ता है। सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुका हूं। वर्ष 2022 में अल्टीमेट खो-खो लीग में भाग लिया। इस टीम ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2023 में इसी लीग में चौथा स्थान प्राप्त किया।
- ध्रुव, पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय महाविद्यालय।
वैश्य महिला महाविद्यालय की शारीरिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हूं। देश की खो-खो टीम की मुख्य कोच चुनी गई हूं। इससे पूर्व साउथ एशियन खो-खो चैंपियनशिप, एशियन खो-खो चैंपियनशिप व नेपाल बनाम भारत टेस्ट मैच में कोच की भूमिका निभा चुकी हूं।
- मुन्नी जून, कोच, वैश्य महिला महाविद्यालय।
किसान परिवार से हूं। प्रथम विश्व कप के लिए आयोजित शिविर में चयन हुआ है। वर्ष 2016 में खो-खो खेलना शुरू किया। गांव में खो-खो का माहौल था। यहां खो-खो खिलाड़ियों को देखकर खेलना शुरू किया। लड़कियां कम खेलती थीं, इसलिए लड़कों के साथ खेली। पिता खेती करते थे। वर्ष 2019 में उनका निधन हो चुका है। मां गृहिणी हैं। भाई खेती कर परिवार के लालन पालन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
- मीनू, छात्रा, वैश्य महिला महाविद्यालय।
गांव में खो-खो खेलते खिलाड़ियों को देखती थी। यहीं से खो-खो के प्रति रुचि बनी। स्कूल में कक्षा छह के दौरान डीपीई अजय ने खो-खो में खेलना शुरू कराया। पिता धर्मबीर मलिक खेती करते हैं। मां गृहिणी हैं। दो भाई हैं। एक सेना में है। दूसरा भाई खो-खो खिलाड़ी हैं।
- बिंदू, छात्रा, वैश्य महिला महाविद्यालय।