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करंट से झुलसे बंदर देख जगी थी पशु प्रेम की भावना

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जो अपना दर्द बता नहीं सकते और जिनका कोई नहीं होता, ऐसे पशु पक्षियों को उठाकर उनकी मलहम-पट्टी करके नई जिंदगी देने का काम शहर के कारोबारी और प्रमुख लोग कर रहे हैं। कुत्ता, बंदर, गोवंशीय पशुओं के अलावा मोर कबूतर सहित करीब दो हजार से अधिक पशु पक्षियों का इलाज दिल्ली रोड पर बने संस्था के कार्यालय पर चल रहा है।
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लावारिस पीड़ित पशु सेवा संघ के प्रधान जगदीश मलिक बताते हैं कि 2007 में भरत कॉलोनी में करंट से झुलसे बंदर की हालत देख उन्होंने पशुओं की सेवा करने की ठान ली। कॉलोनी के युवाओं और बुजुर्गों ने साथ दिया और यह संस्था बन गई। तब से कहीं भी किसी पशु के घायल होने पर उसे उठाकर संस्थान में लाकर उसका इलाज किया जाता है। साथ ही उनके चारे आदि की व्यवस्था की जा रही है। आलम यह है कि किसी गोवंश की टांग काटी जा चुकी हे तो दो बंदर करंट की चपेट में आकर अपनी जान गवां चुके हैं। इसी तरह सड़क हादसों में घायल कुत्तों का इलाज पशु विशेषज्ञ चिकित्सक कर रहे हैं। पशुओं के लिए दवाइयों और चारे का इंतजाम समाज के लोग करते हैं।
पशु सेवा में जुटे हैं ये लोग
प्रॉपर्टी कारोबारी वीरेंद्र राठी, रोडवेज कर्मचारी नरेंद्र अहलावत, कपड़ा कारोबारी संजय बंसल, पुलिस उपनिरीक्षक से सेवानिवृत्त ओमप्रकाश नांदल, रेडीमेड कारोबारी सन्नी मलिक, परवीन मल्हारा नीटू, प्रेम कुमार, कर्मवीर, सत्या मलिक, तस्वीर हुडा, महेंद्र दलाल।
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पशु चिकित्सा में लगी है टीम
पशुओं के इलाज और उनके चारे की व्यवस्था में करीब 90 कर्मचारी लगे हैं। संस्था के पास तीन एंबुलेंस हैं, जो घायल पशु की सूचना पर उसे लादकर लाती हैं। वेटनरी सर्जन डॉ. धर्मपाल शर्मा और उनके पांच सहयोगी पशुओं का इलाज करते हैं।
संस्था पर आकर पशु सेवा करें, किसी को चंदा न दें
संस्था के प्रधान जगदीश मलिक कहते हैं कि संस्था से कोई भी कहीं चंदा लेने नहीं जाता है। पशु प्रेमी खुद आते हैं और पशुओं के लिए मदद देते हैं। खुद सेवा भी करते हैं। यदि कभी कोई संस्था के लिए दान मांगने जाए तो इसकी सूचना उन्हें दें ताकि ऐसे फर्जी लोगों पर कार्रवाई कराई जा सके।
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