मंडी में बाजरा बेचने आए किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के सामने भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्याएं आ रही है। किसी का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं मिल रहा है, तो किसी का रजिस्ट्रेशन कम जमीन पर मिल रहा है। कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने जितनी जमीन पर फसल होने का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था वो अब विभाग के रिकॉर्ड में कम दिखा रहा है। किसी ने दो एकड़ के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था व बाजरा बेचने आए तो उसका एक एकड़ का ही रजिस्ट्रेशन मिला। जिस कारण किसान का आधा बाजरा ही बिक पा रहा है। किसानों को गांव वाइज रोस्टर बनाने से भी दिक्कतें हो रही है।
दो एकड़ का कराया था रजिस्ट्रेशन, रिकॉर्ड में मिला एक एकड़ : राजेंद्र सिंह
बाजरा बेचने आए किसान राजेंद्र ने कहा कि उन्होंने दो एकड़ का रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन जब वह बाजरा बेचने आया तो रिकॉर्ड में एक ही एकड़ मिला। इस प्रकार की समस्या अनेक किसानों के साथ आ रही है, जिसके कारण किसानों को परेशानी हो रही है। वहीं किसानों द्वारा रजिस्ट्रेशन के समय सभी दस्तावेज ऑनलाइन जमा करवाए जाते हैं, लेकिन जब बाजरा बेचने आए तो फिर से वहीं दस्तावेज किसानों से मांगे जाते हैं।
मोबाइल पर किया रजिस्ट्रेशन, नहीं मिला रिकॉर्ड में : धर्मबीर
किसान धर्मबीर ने बताया कि उन्होंने अपने ही मोबाइल पर खुद पौने दो एकड़ का रजिस्ट्रेशन किया था, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन सक्सेसफुल का मेसेज भी आ गया था। जब मंडी में बाजरा लेकर आया तो उनका रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में नहीं मिला। अब उन्हें मार्केट में सस्ते दामों पर ही बाजरा बेचना पड़ेगा।
सवा दो एकड़ का था रजिस्ट्रेशन : महाबीर
किसान महाबीर ने बताया कि उन्होंने सवा दो एकड़ का रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन रिकॉर्ड में एक ही एकड़ का रजिस्ट्रेशन मिला। जिस कारण उसकी आधी फसल ही बिकेगी। एक एकड़ को भी उसे सीएचसी सेंटर पर 200 रुपये देकर दोबारा वेरिफाई करवाना पड़ा।
इसके अलावा किसानों ने बताई ये समस्याएं :
1. किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा जो गांव वाइज रोस्टर बनाया गया है उससे भी परेशानी हो रही है। फसल अपने समय पर ही पकेगी और किसान फसल को खेत से सीधा मंडी में लेकर जाना चाहता है। लेकिन जिस दिन जिस गांव के किसानों का नंबर मंडी में फसल बेचने का आता है या तो उस समय उसकी फसल पकी नहीं होती या फिर कुछ किसानों की एक-एक सप्ताह पहले फसल पक चुकी होती है जिसे काटकर उसे पहले घर पर ढोना पड़ता है फिर मंडी में लेकर जोते हैं। जिससे डबल-डबल मजदूरी देनी पड़ती है।
2. एक एकड़ में 20 क्विंटल बाजरा ही सरकारी रेट पर खरीदा जा रहा है, लेकिन किसी किसान के पास एक एकड़ में 20 क्विंटल से अधिक बाजरा पैदा होता है तो उसे बचे हुए बाजरे को सस्ते रेटों में बेचना पड़ता है। किसानों की मांग है कि इसकी लिमिट हटा दी जाए।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेेशन में सेल्फ डिक्लेरेशन होता है, जिसे किसानों द्वारा खुद ही मेरी फसल मेरा ब्योरा पर भरा जाता है। वह जो जमीन भरते हैं, उसे बाद पटवारी द्वारा वेरिफाई किया जाता है। क्रॉस चेक में जितनी जमीन आती है उसका रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है, और किसानों को उसे वेरिफाई भी कराना होता है कि कितने एकड़ का रजिस्ट्रेशन हुआ है। विभाग द्वारा लगभग तीन माह तक गांव-गांव, घर-घर जाकर किसानों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया गया है। जिसमें अलग-अलग विभागों से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
- दीपक लोहचब, सचिव मार्केट कमेटी, रोहतक