एशियन चैंपियनशिप में पहलवानों के बगैर ट्रायल हुए चयन पर खाड़ों में पसीना बहा रहे पहलवानों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भार वर्ग 53 किलोग्राम मेें पिछले चार साल से एशियन चैंपियनशिप में खेलने को लेकर उत्साहित महिला पहलवानों ने तो इस चयन को अपने साथ घोर अन्याय करार दिया है। महिला पहलवानों ने दो टूक कहा है कि इस चयन ने हमारा चैंपियनशिप में खेलने का सपना ही चकनाचूर कर दिया। उन्हें बगैर आजमाए ही स्पर्धा से बाहर कर दिया गया है। यह खेल और खिलाड़ी दोनों के हित में नहीं है।
यह बोले खिलाड़ी
एशियन चैंपियनशिप में खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है। मैने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। अपना वजन 60 किलो से घटा कर 53 किलो किया है। बगैर ट्रायल चयन गलत है। इससे हमारी मेहनत बेकार साबित हो रही है। किर्गिस्तान में हुई अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक, सीनियर वर्ग में कांस्य पदक, सीनियर ग्रैंड प्रिक्स में स्वर्ण पदक, फेडरेशन कप में कांस्य पदक, खेलो इंडिया व ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं।
रजनी, छोटूराम स्टेडियम अखाड़ा।
पहलवानी करते हुए एशियन चैंपियनशिप की पूरी तैयारी की थी। इसके लिए ट्रायल होना था। बाद में पता लगा कि चयन पहले ही हो गया है। ट्रायल नहीं होने से हमें हमारी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का मौका ही नहीं मिला। ट्रायल में हम भी खुद को आजमाते और दूसरे भी। बगैर ट्रायल किसी का चैंपियनशिप में जाना गलत है। अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक, स्कूल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। चैंपियनशिप में मौका मिलता तो यहां भी खुद साबित करती।
तमन्ना, छोटूराम स्टेडियम अखाड़ा।
कुश्ती की 62 किलो भार वर्ग की खिलाड़ी के तौर पर अभ्यासरत हूं। भार वर्ग 53 व 65 के लिए बगैर ट्रायल पहलवानों के चयन का पता लगा। यह गलत है। ट्रायल होना चाहिए। एशियन चैंपियनशिप चार साल में एक बार होती है। इसमें खेला सभी का सपना होता है। इसके लिए पिछले चार साल से कड़ी मेहनत कर रही हूं। मेहनत से ज्यादा इस चैंपियनशिप के लिए इंतजार करना बड़ी बात होती है। खिलाड़ी को इस लंबे इंतजार के बाद बगैर मुकाबले के ही बाहर कर दिया जाए तो उसकी भावनाओं को समझा जा सकता है।
सारिका, बसंत विहार।
एशियन चैंपियनशिप में खेलना मेरा लक्ष्य है। इसके लिए पिछले तीन साल से अपना घर, जिला व प्रदेश छोड़ कर यहां अभ्यासरत हूं। अब पता लगा कि 53 किलो भार वर्ग में पहले ही किसी खिलाड़ी का चयन हो गया है। जबकि उसने न ट्रायल दिया न उसने साल भर से अभ्यास किया है। ऐसे में चैंपियनशिप में खेलने का सपना चूरचूर हो गया है। जूनियर वर्ग अंडर-20 में कांस्य पदक, फेडरेशन कप में रजत पदक, स्कूली खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। चैंपियनशिप का मौका मिलता तो अच्छा होता। इसका लंबा इंतजार किया है।
दीक्षा, रामगोपाल कॉलोनी।
खिलाड़ियों के चयन के लिए ट्रायल किया जाना चाहिए था। एशियन चैंपियनशिप में खेलने के लिए खिलाड़ी चार साल इंतजार करते हैं। कड़ी मेहनत करते हैं। इसमें चयन निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से होना चाहिए। किसी के साथ भेदभाव बरतना गलत है। लोग कर्ज लेकर अपने बच्चों को पहलवानी कराते हैं। ऐसे में वे चैंपियनशिप में चयन से वंचित रह जाए, यह दुखद है। ट्रायल से चयन होना चाहिए। अच्छे खिलाड़ी चुनकर आगे भेजे जाने चाहिएं।
जगदीश ढांडा, कुश्ती कोच, मॉडल टाउन।