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अदालत ने शिक्षा विभाग पर लगाया 10 हजार रुपये का जुर्माना

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रोहतक। जिला शिक्षा विभाग को सेवानिवृत्त प्राध्यापक द्वारा दायर मेडिकल क्लेम की याचिका रद्द करने के लिए अर्जी देना महंगा पड़ गया। उल्टा अदालत ने रिटायर प्राध्यापक के जवाब लेकर विभाग पर ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। साथ ही सीनियर डिविजन के सिविल जज मंगलेश कुमार चौबे ने आदेश दिए कि 13 दिसंबर तक पांच हजार रुपये जुर्माना राशि में से पांच हजार रुपये रिटायर प्राध्यापक को दिए जाएं और पांच हजार जिला लीगल सर्विस अथॉरिटी में जमा करवाए जाएं।
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आजादगढ़ निवासी जयपाल अहलावत ने बताया कि वे सुंडाना गांव से साल 2019 में राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। नियमों के तहत सरकार की तरफ से सेवाकाल के दौरान व रिटायर होने के बाद एक सीमा में मेडिकल भत्ता मिलता है। जुलाई 2021 में उनकी पत्नी का हांसी के एक अस्पताल में पेट का ऑपरेशन हुआ था। जबकि मार्च 2022 में उसने आंख का लेंस डलवाया था। मार्च माह में ही उन्होंने शिक्षा विभाग को 32 हजार रुपये के बिल जमा करवा दिए थे। जब बिल पास नहीं किए गए तो उन्होंने लीगल नोटिस भेजा, क्योंकि वह रिटायर होने के बाद जिला अदालत में वकालत करते हैं। विभाग की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं आया। ऐसे में उन्होंने 18 अगस्त 2022 को अदालत में याचिका दायर की। 28 अक्तूबर को विभाग को जवाब देना था। लेकिन विभाग ने जवाब देने की जगह अर्जी दायर की कि याचिका कर्ता ने नियमों के तहत मेडिकल बिल जमा नहीं करवाए। ऐसे में उसकी याचिका को रद्द किया जाए। सेवानिवृत्त प्राध्यापक ने अदालत में शिक्षा विभाग की याचिका का एक-एक करके जवाब दिया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने शिक्षा विभाग पर ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। साथ ही हिदायत दी कि यह राशि अगली सुनवाई तक जमा करवा दी जाए।
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