संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सके, इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा। संघ पिछले 100 वर्षों से इसके लिए ही कार्यरत है। समाज परिर्वतन के लिए समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होना होगा और सद्भाव के साथ सभी महापुरुषों की जयंती मिलकर मनानी होंगी, तभी राष्ट्र मजबूत होगा और जात-पात की खाई को पाटा जा सकेगा।
वह रविवार को रोहतक के गोहाना रोड स्थित शिक्षा भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सज्जन शक्ति की समाज परिवर्तन में भूमिका विषय पर सामाजिक सद्भाव पर विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, क्षेत्र प्रचारक जतिन कुमार, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य रामेश्वर, क्षेत्र कार्यवाह रोशन लाल, प्रांत संघचालक प्रताप सिंह, प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल, कार्यवाह डॉ. प्रताप सिंह, सहकार्यवाह राकेश, डॉ. प्रीतम सिंह, प्रचार प्रमुख राजेश कुमार आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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सभी देशों से अच्छी हमारी ज्ञान परंपरा
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि प्राचीन काल में भारत की ज्ञान परंपरा, संस्कृति विश्व के सभी देशों से अच्छी थी लेकिन हम जाति-पाति, भिन्न-भिन्न पंथों में बंट गए। विदेशी आक्रांताओं ने इसका फायदा उठाया और हमें लंबे समय तक गुलामी झेलनी पड़ी। इसका परिणाम यह रहा कि देश की स्वतंत्रता के वर्षों बाद भी हम गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
समाज की सज्जन शक्ति के प्रयास जरूरी
उन्होंने कहा कि सरकार का काम होता है बाहरी ताकतों से देश की रक्षा करना, देश में संतुलन बनाए रखना, कानून व्यवस्था स्थापित करना लेकिन युवाओं का मार्गदर्शन करना, उनमें संस्कार का निर्माण करना, संस्कृति को बढ़ावा देना, कुरीतियों को खत्म करना, अच्छे नागरिक तैयार करना, इन सबकी जिम्मेदारी समाज की होती है। इसके लिए समाज की सज्जन शक्ति को ही प्रयास करने होंगे।
समाज परिवर्तन के लिए पांच संकल्प लिए
संघ ने समाज परिवर्तन के लिए पाचं संकल्प लिए हैं। इसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, कुटुम्ब प्रबोधन व नागिरक कर्तव्य हैं। हमें देश को स्वाभिमानी व शक्तिशाली बनाना है तो इन पांच संकल्पों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प लेना होगा। सरकार्यवाह दत्तात्रेय ने समाज के लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। संघ समाज में माला के धागे की तरह काम करता है।
जीवनभर सीखने की हो जिज्ञासा
दूसरी ओर बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में हुई शिक्षक जन गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि जो व्यक्ति जीवनभर विद्यार्थी बना रहता है, वही सच्चा शिक्षक कहलाने योग्य होता है। जिस दिन किसी व्यक्ति में सीखने की जिज्ञासा समाप्त हो जाती है, उसी दिन उसकी गति रुक जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महंत बालकनाथ योगी ने की, मंच संचालन प्रो. पवन जालवाल ने किया।
12 रोहतक के गोहाना रोड स्थित शिक्षा भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हुई विचार गोष्ठी को संबो