रोहतक। डेढ़ दशक में बोहर के 18 हजार प्रॉपर्टी मालिक खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। 2010 से अब तक कहने को गांव नगर निगम में शामिल हो गया। हकीकत में पानी, सीवर व सफाई की बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं मिल पाई हैं। ऊपर से नगर निगम ने कचरा शुल्क जोड़कर 10 गुना प्रॉपर्टी टैक्स भेज दिया। गांव के पार्षद का कहना है कि मामले को सदन में उठाया जाएगा। निगम आयुक्त से भी इस संबंध में मिलेंगे।
साल 2010 में प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नगर परिषद को भंग करके नगर निगम का दर्जा दिया था। शहर के साथ लगते नौ गांवों को निगम में शामिल किया गया। इसमें बोहर गांव भी शामिल था।
गांव की करोड़ों रुपये की पंचायती जमीन भी निगम में चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि उम्मीद थी कि गांव को शहर जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। ऐसा कुछ नहीं हुआ। लंबे समय से गलियों की सफाई नहीं हुई। पूरे गांव में सीवर लाइन तक नहीं दबाई गई। पीने के पानी के लिए महिलाओं को नलकों से पानी लाना पड़ रहा है।
बोहर निवासी अंश कौशिक ने बताया कि पिछले साल एक हजार के करीब प्रॉपर्टी टैक्स का बिल आया था, लेकिन इस बार 10 हजार के करीब बिल भेज दिया। इसमें टैक्स कम और कचरा उठान शुल्क लिया जाता है। सफाई कर्मचारी आते नहीं। गलियों में कीचड़ फैला रहता है।
नगर निगम में गांव से चार पार्षद, फिर भी ये हाल
नगर निगम के चार पार्षद ऐसे हैं, जिनका मूल गांव बोहर है। इसमें वार्ड 10 की महिला पार्षद मनीषा नांदल व हाल में मनोनीत पार्षद रमेश बोहर गांव में ही रहते हैं जबकि वार्ड 12 के पार्षद सुशील नांदल व वार्ड 13 की पार्षद कृष्णा देवी का मूल गांव बोहर ही है।
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बोहर गांव में 18 हजार के करीब प्रॉपर्टी हैं। निगम की तरफ से भारी-भरकम प्रॉपर्टी टैक्स भेजा गया है। ग्रामीणों की लगातार शिकायतें आ रही हैं। निगम से सफाई के लिए 15 कर्मचारी मांगे थे लेकिन चार मिले हैं। ऊपर से कचरा उठान शुल्क जोड़कर भेजा गया है। पूरे मामले को सदन में जोर-शोर से उठाया जाएगा।
- मनीषा नांदल, पार्षद वार्ड नंबर 10
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निगम क्षेत्र में 2.20 लाख के करीब प्रॉपर्टी हैं। सरकार की पॉलिसी के तहत ही कचरा उठान शुल्क जोड़कर प्रॉपर्टी टैक्स के बिल भेजे गए हैं। जहां तक सफाई का सवाल है, हाईकोर्ट में केस होने के कारण नया टेंडर नहीं हो सका। निगम कर्मचारियों से सफाई करवाई जा रही है।
- डाॅ. आनंद शर्मा, आयुक्त नगर निगम