रोहतक। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल तिलियार झील की सफाई व रखरखाव व्यवस्था चरमराई हुई है। इसके दो पुल टूटे हुए हैं। ये कभी भी ढह सकते हैं। इन पुलों से गुजरने पर पर्यटकों की सांसें अटक जाती हैं। बारिश के बाद झील के प्रवेश द्वारा पर ही जलभराव है।
ट्रैक पर भी पेड़ों के पत्ते पड़े हैं। कर्मचारी सफाई के बाद ट्रैक के आसपास झाड़ियों में ही कूड़ा फेंक देते हैं। कूड़ेदान की व्यवस्था नहीं है, जिस कारण यहां घूमने आ रहे पर्यटक कूड़ा इधर-उधर फेंक देते हैं।
झील का पानी भी साफ नहीं। इसमें काई के साथ पॉलिथीन और पेड़ों के पत्ते फैले हैं। किनारों पर घास जमा है। झील के प्रवेश द्वार के पास पार्क स्थित है। इसमें भी कचरा पड़ा रहता है। यहां घूमने आए राकेश ने बताया कि झील की हालत हमेशा ही ऐसी रहती है। वह सपरिवार यहां आए थे लेकिन बदहाल सफाई व्यवस्था देखकर अब यहां आने पर पछतावा महसूस हो रहा है।
20 साल बाद पत्नी के साथ घूमने आए पर्यटक मुकेश सामने टूटे पुल को देखकर कहा कि झील के पुल तो कभी भी गिर सकते हैं। यह नाव पर कभी गिर सकता है। एक अन्य पर्यटक सुरेंद्र ने बताया कि पानी भी साफ नहीं है। किनारों पर घास खड़ी है।
पर्यटक आकर ही फैलाते हैं कूड़ा : नरेंद्र राणा
तिलियार झील के प्रबंधक नरेंद्र राणा ने सफाई व्यवस्था सुचारु न होने का आरोप पर्यटकों पर ही लगा दिया। कहा कि झील की सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। कर्मचारी सुबह आकर सफाई कर देते हैं। पार्क में उगी घास को भी समय पर काटा जाता है। यहां पर्यटक आकर ही कूड़ा फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि पुलों की सीढि़यां को पर्यटकों ने ही तोड़ा है। इनकी मरम्मत की प्रक्रिया चल रही है। चार माह के अंदर इन्हें बना दिया जाएगा। पुल की सिर्फ एक ही तरफ की सीढि़यां मामूली सी टूटी हुई हैं।
कैप्शन:
चलने के ट्रैक पर पड़ा कचरा।au2
झील के बीच तैरता कूड़ा।au3
झील के बीच बने इस उपकरण पर पड़े पाॅलिनीन व अन्य कचरा।au4
नाव से सैर करने की सुविधा देने वालों के पास किनारों के पास का पानी।au5
ट्रैक के पास की स्थिती।au6
किनारे पर बनी सीमेंट से बना ढांचा जिस पर लोग फोटो भी खींचते हैं।au7
किनारे पर उगी घास व उसमें फंसी बोतलें।au8
मुख्य एंट्री पर जमा पानी।au9
तिलियार झील के टूटे पुल से गुजरते पर्यटक। संवाद- फोटो : तिलियार झील के टूटे पुल से गुजरते पर्यटक। संवाद