एक तरफ केंद्र व राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना को अपनी उपलब्धि में गिनवा रही है, दूसरी ओर इसकी जनता में फजीहत हो रही है। सूबे के सबसे बडे़ चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस रोहतक में कैथल से उपचार के लिए 11 जनवरी को आए एक वृद्ध मरीज को संस्थान में 21 दिन बाद भी उपचार नहीं मिला है। हाथ की हड्डी में फ्रैक्चर होने की वजह से मरीज को इम्प्लांट लगाया जाना था। इम्प्लांट व सर्जरी का कुछ सामान संस्थान में न होने की वजह से मरीज को 12 दिन बाद यह आश्वासन देते हुए घर भेज दिया गया कि जैसे ही उसके आपरेशन का सामान आ जाएगा, आपरेशन कर देंगे। लेकिन हैरानी की बात है कि 21 दिन बाद भी मरीज का आपरेशन नहीं हुआ है, लिहाजा अब मरीज के हाथ में पस पड़नी शुरू हो गई है, जिससे मरीज का दर्द हर दिन बढ़ता जा रहा है।
प्रदेश के सबसे बडे़ चिकित्सा संस्थान में आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार के लिए आने वाले लाभ पात्रों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। यहां इम्प्लांट व सर्जरी का सामान न होने के नाम पर लाभ पात्रों को कई - कई दिनों लटकाया जाता है। भले ही मरीज की जान जोखिम में आती हो। मरीजों की मजबूरी हो जाती है कि वह अपनी जेब से उपचार का खर्च वहन करें। ऐसे में उन मरीजों की समस्या बढ़ जाती है जो आर्थिक रूप से अधिक कमजोर होते हैं। कैथल के मटौर निवासी कुलदीप ने बताया कि उसके 62 साल के पिता भान सिंह छत से गिर गए थे। इसके चलते उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। वह कैथल से रोहतक पीजीआईएमएस यह सोच कर आए कि उनका अच्छा उपचार होगा। हाथ में फ्रैक्चर के चलते मरीज के हाथ में अब अधिक पस बन रही है, लेकिन उपचार का अता पता नहीं है। पीजीआईएमएस में आर्थो विभाग के डॉक्टरों ने मरीज को देखते ही ऑपरेशन बताया, लेकिन अभी तक आपरेशन नहीं हुआ है। अब मरीज के हाथ की हालत खराब है, निजी अस्पताल मरीज को दाखिल भी नहीं कर रहे। ऐसी हालत में अब वह कहां जाए। ऑपरेशन के सामान के लिए वह पीजीआईएमएस के प्रशासनिक अधिकारियों के बार-बार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
पहले भी मरीजों को नहीं मिला उपचार
30 जून को बहादुरगढ़ से आए मरीज को ऑर्थो विभाग ने उपचार देने की बजाए कहा कि उसका उपचार मोदी जी ही करेंगे। मरीज उमेश के दाखिल होने के एक सप्ताह बाद भी उपचार नहीं दिया गया। जब मरीज ने शिकायत की तो उस पर दबाव बनाया गया। जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश गर्ग को शिकायत के बावजूद मरीज की समस्या का समाधान नहीं हुआ। वहीं संस्थान का दावा है कि उन्होंने शीर्ष अधिकारियों से संस्थान में सामान न होने पर अमृत फार्मेसी से सामान खरीदने की अनुमति मांगी है। इसके अलाव रेट कांट्रेक्ट होना है, इसके बाद कोई समस्या नहीं आएगी।
मरीज की शिकायत आई थी, इसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास भेज दिया था। पीजीआईएमएस डीएमईआर के अधीन होता है और हम स्वास्थ्य विभाग के। इसलिए हम सीधा कार्रवाई नहीं कर सकते। कागजी कार्रवाई के नाम पर हम निदेशक को पत्र लिख देते हैं। आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को आने वाली समस्या की जानकारी फिर एसीएस हेल्थ को भेजी जाएगी।
- डॉ. दिनेश गर्ग, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना, स्वास्थ्य विभाग