रोहतक। हरियाणा में बिहार के किशोर से दो माह तक बंधवा मजदूरी कराने और प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। 16 वर्षीय किशोर को बंधवा मजदूरी के दाैरान पीटा गया। गोवंश के लिए चारा काटते समय उसका हाथ कट कर लटक गया तो आरोपियों ने ब्लेड से लटकती खाल काटकर पूरा हाथ धड़ से अलग कर दिया और आंखों में पट्टी बांधकर उसे नूंह ले जाकर सड़क पर छोड़ भागे।
नूंह पुलिस ने नागरिक अस्पताल में इलाज कराया जहां से पीजीआई रोहतक रेफर किया गया। मामला संज्ञान में आने के बाद पीजीआई में मंगलवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने उसके बयान दर्ज किए साथ ही काउंसिलिंग भी की। किशोर का पीजीआई में इलाज चल रहा है। मंगलवार को पीड़ित किशोर ने बताया कि उसकी उम्र 16 साल है। बिहार के किशनगंज में घर है। कैथल के किठाना गांव में पिता ऋषिदेव (40) व भाई जितेंद्र (23) के साथ दो साल पहले आया था और यहीं रहकर सभी मजदूरी करते हैं।
26 मई को मैं और पिता ट्रेन से किशनगंज घर जा रहे थे तभी बहादुरगढ़ स्टेशन में पानी लेने उतरा तो ट्रेन चल दी और पिता से मैं वहीं छूट गया। रात भर पिता का इंतजार किया। जेब में पैसे नहीं थे। रात से भूख सता रही थी। स्टेशन पर अकेला देखकर अलीम नाम का व्यक्ति मिला और 10 हजार रुपये महीने की पगार पर काम का लालच देकर मुझे अपने साथ खेतों के बीच में एक डेरी पर ले गया। वहां आरोपी अनिल, इशान, सुलोचना, मुन्नी आदि बंधक बनाकर मजदूरी कराते थे। हर समय पीटते थे। दो बार भागने की भी कोशिश की लेकिन दोनों बार उन्होंने पकड़ लिया।
25 जुलाई को चारा काटते समय बायां हाथ चपेट में आ गया और कट कर लटक गया। आरोपियों ने लटकने वाली खाल को ब्लेड से काट कर हाथ धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद मेरी आंख में पट्टी बांधी और सड़क पर छोड़ गए। राहगीरों ने कटा हाथ देखा तो पुलिस को सूचना दी तब पता चला वह क्षेत्र नूंह है। पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया।
वहीं, नूंह पुलिस ने किशनगंज पुलिस के माध्यम से किशोर के परिजनों से संपर्क किया। वहां से गांव का पता चला। गांव से पिता और भाई का फोन नंबर लेकर उनसे बात की। सूचना मिलने पर किशोर का बड़ा भाई नूंह पहुंचा और वहां से पीजीआई लाया। पिता ने बताया कि बेटा बाेला- जहां उसे रखा था, वहां 10 लोग थे जिनमें पांच महिलाएं थीं। चार-पांच लोगों के नाम बच्चे ने बताए हैं। मिशन ऑफ डेस्टीट्यूट एंड डेसपिरेट ऑफ इंडिया (एमडीडी) के कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र सिंह मान ने कहा कि हमारी जिला टीम पीड़ित बच्चे की हरसंभव मदद कर रही है। टीम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी कुलदीप सिंह, बाल कल्याण समिति की चेयरमैन आशा आहुजा, बाल संरक्षण अधिकारी संस्थागत मोनी, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन, दिल्ली से एडवोकेट सुमित रोहिल, सुभाष चंद्रा मौजूद रहे।
जीआरपी कार्रवाई करती तो नहीं जाता किशोर का हाथ
किशोर के लापता होने के बाद परिजनों ने रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर जीआरपी थाने में शिकायत दी थी। बहादुरगढ़ जीआरपी थाना पुलिस ने कार्रवाई करने की जगह किशोर को ढूंढ़ने का आश्वासन दिया। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। जीआरपी कार्रवाई करती तो किशोर को ढूंढा जा सकता था।
जीआरपी थाने में इस तरह की कोई शिकायत दी गई होगी। पुलिस ने जरूर कार्रवाई की होगी। पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो जांच अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।
राजेश कुमार, डीएसपी जीआरपी
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गंभीर हालत में किशोर को नूंह थाने ले जाया गया। नूंह थाना पुलिस ने परिजनों का पता लगाया व किशोर को पीजीआई में भर्ती कराया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन की सहयोगी संस्था एमडीडी ऑफ इंडिया भी आयोग की टीम के साथ माैजूद रही। यहां पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली। अभी आरोपियों के बारे में जानकारी नहीं हो सकी है। हाथ कटने से किशोर सदमे में है। काउंसिलिंग की जा रही है। पुलिस के माध्यम से आरोपियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी।
-गणेश कुमार, सदस्य, राज्य बाल संरक्षण आयोग