23सीटीके11-एमडीयू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपने विचार रखते स्वामी आर्यवेश।स्रोत : ए
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में रविवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। इसका विषय महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन और दर्शन रहा।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने महर्षि दयानंद को युग दृष्टा बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने संस्कार विधि से मानवता को दिशा दी। जातिगत भेदभाव, स्त्री समाज के प्रति अन्याय के खिलाफ अलख जगाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों तथा संस्कारों के निर्माण में महर्षि दयानंद सरस्वती का अतुलनीय योगदान है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन एवं दर्शन को मूर्त रूप दे रहा है। छात्र कल्याण प्रो. रणदीप राणा ने किया। मंच संचालन सहायक प्रोफेसर डाॅ. रवि प्रभात ने किया। इसका आयोजन विश्वविद्यालय का महर्षि दयानंद एवं वैदिक अध्ययन केंद्र, संस्कृत, पालि एवं प्राकृत विभाग तथा छात्र कल्याण विभाग संयुक्त रूप से कर रहा है। लखनऊ विवि के डाॅ. सत्यकेतु, राजकीय महाविद्यालय बालाघाट नैनीताल के प्राचार्य प्रो. विजय विद्यालंकार, महर्षि दयानंद सरस्वती विवि, अजमेर के डाॅ. नरेश धीमान ने विचार साझा किए।
इस अवसर पर महर्षि दयानंद गुरुकुल न्यूयार्क यूएसए ने बतौर विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता भाग लिया। आचार्या सुकामा, डाॅ. सतीश प्रकाश और प्रो. सुरेन्द्र कुमार स्त्री शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए महर्षि दयानंद के योगदान, उनके प्रेरणादायी लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान पर विचार साझा किए।