11...लाखन माजरा में बुटीक कार्य करते हुए सुदेश । संवाद
रोहतक। लाखनमाजरा की सुदेश ने अपने हुनर से साबित कर दिया कि आत्मनिर्भर बनने के लिए सिर्फ हौसले की जरूरत होती है। जो हाथ कभी सिलाई मशीन से डरते थे, आज वही सफलता की कहानी बुन रहे हैं।
दसवीं तक पढ़ी सुदेश बताती हैं कि शुरुआती में ना उन्हें मशीन चलानी आती थी ना ही कपड़ों की फिटिंग का अनुभव था लेकिन उन्हेंने हार नहीं मानी। दस साल पहले उन्होंने उन्नति स्वयं सहायता समूह से प्रशिक्षण लिया।
10 हजार रुपये लोन पर लेकर सिलाई मशीन खरीदी और कपड़े सीलने का काम शुरू किया। फिर इस कार्य को स्वरोजगार बना लिया और आज वे दूसरी महिलाओं को हुनर सीखने के लिए प्रेरित करती हैं।
सुदेश बताती हैं कि चार साल पहले उन्होंने 30 हजार रुपये लोन लिया और आधुनिक मशीन खरीदी, जिससे उनके कार्य को सराहना मिली और पहले से ज्यादा ऑर्डर आने लगे। अफना बुटीक के स्वरोजगार से वे प्रति माह 10 से 11 हजार रुपये कमा रही हैं।