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Rohtak News: धड़ल्ले से लगाए जा रहे सबमर्सिबल, फिर भी गुणवत्ता खराब

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17...रोहतक की आंबेडकर कॉलोनी के एक घर में लगा सबमर्सिबल। संवाद
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रोहतक। पेयजल समस्या से परेशान लोग घरों में धड़ल्ले से सबमर्सिबल लगवा रहे हैं। इसके बाद भी लोगों को खारा पानी नसीब हो रहा है। शहर के करीब 30 हजार से अधिक मकानों में लोग सबमर्सिबल के पानी से काम चला रहे हैं।
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इनकी संख्या बढ़ रही है जबकि जिले में फ्लोराइड की मात्रा भी अधिक दर्ज की जा रही है। वहीं विभागों ने तो घरेलू सबमर्सिबल की एनओसी का रिकॉर्ड न होने की बात कही है।
शहर में 5.15 लाख आबादी है। इनमें 90 हजार जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेयजल कनेक्शन दिए गए हैं। एक लाख से अधिक दूषित जलापूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से ही 30 हजार से अधिक मकान मालिकों से घरों में घरेलू सबमर्सिबल लगे हुए हैं।
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जिले का जलस्तर पहले ही लगातार गिर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रोहतक में नाइट्रेट 45 एमजी-लीटर से अधिक और फ्लोराइड 1.5 एमजी-लीटर से अधिक जैसे रासायनिक तत्व कई स्थानों पर अनुमान सीमा से ऊपर पाए गए हैं।
भू-जल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नाइट्रेट और फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक रोहतक और आसपास के जिलों में है। सस्ती बिजली, पारंपरिक फसल चक्र और आधुनिक सिंचाई तकनीकों का सीमित उपयोग भूजल गिरावट के मुख्य कारण हैं।
किसान मजबूरी में ज्यादा पानी खपत वाली फसलें उगा रहे है जिससे जल संकट और गहराता जा रहा है। उन्होंने बताया कि भूजल स्तर बीते कुछ वर्षों में लगातार नीचे है। प्री-मानसून अवधि में कई क्षेत्रों में जलस्तर 20 मीटर से भी अधिक गहराई पर पहुंच चुका है।
मानसून के बाद कुछ सुधार अवश्य होता है लेकिन यह सुधार अस्थाई साबित हो रहा है। गुणवत्ता की दृष्टि से भी रोहतक की स्थिति संतोषजनक नहीं कही जा सकती। कई इलाकों में नाइट्रेट और फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है।
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कॉमर्शियल सबमर्सिबल कनेक्शन के लिए ही एनओसी की आवश्यकता होती है। कृषि भूमि में लगे सबमर्सिबल का रिकॉर्ड बिजली निगम के पास हो सकता है जबकि घरेलू कनेक्शन के लिए कोई एनओसी का प्रावधान नहीं है। -डॉ. दलबीर राणा, हाइड्रोलोजिस्ट, भू-जल विभाग।
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