रोहतक। एमडीयू के मुख्य द्वार पर जारी धरना प्रदर्शन मंगलवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप एवं छात्रों के लिखित एफिडेविट के उपरांत शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह पब्लिक यूनिवर्सिटी है। यहां प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित, अनुशासित और अध्ययन-अनुकूल परिसर उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिक एवं वैधानिक जिम्मेदारी है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रकरण की पृष्ठभूमि में कुल पांच विद्यार्थियों से संबंधित अनुशासनात्मक कार्यवाही रही है। इनमें से एक विद्यार्थी को विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकार की ओर से अनुशासनहीनता के आधार पर रस्टिकेट करते हुए दो वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया।
शेष चार विद्यार्थियों को 15 दिवस के भीतर अच्छे आचरण का शपथपत्र प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया लेकिन निर्धारित अवधि में शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किए गए।
तत्पश्चात प्रॉक्टोरियल बोर्ड की संस्तुतियों पर एक माह का अतिरिक्त अवसर भी दिया गया। उस अवधि में भी शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किए गए। यह मामला 19 सितंबर को कुलपति आवास परिसर में कथित आपराधिक अनधिकृत प्रवेश जैसी गंभीर घटना से भी संबंधित रहा जिसके मद्देनज़र प्रॉक्टोरियल बोर्ड की संस्तुतियों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की गई।
विश्वविद्यालय ने बताया कि उक्त चार में से एक विद्यार्थी बाद में सदाचार शपथपत्र प्रस्तुत कर दिया गया था। शेष तीन विद्यार्थियों ने शपथपत्र प्रस्तुत न किए जाने पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड की संस्तुतियों के अनुरूप उन्हें रस्टिकेट किया गया व आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई।
रस्टिकेट किए गए तीन विद्यार्थियों और दो पूर्व विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय गेट पर धरना प्रदर्शन आरंभ किया गया। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से उपमंडल दंडाधिकारी आशीष कुमार के मध्यस्थ प्रयासों के उपरांत सभी संबंधित व्यक्तियों ने अपने-अपने शपथपत्र प्रस्तुत किए।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने शपथपत्रों का संज्ञान लेते हुए कहा कि प्राप्त शपथपत्र प्रॉक्टोरियल बोर्ड को अग्रेषित किए जाएंगे और बोर्ड की संस्तुतियों के अनुरूप तथा विश्वविद्यालय नियमों और प्रक्रिया के तहत आगे आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।